बेतला, पलामू किला और महुआटांड भेड़िया अभयारण्य को जोड़कर बनेगा एकीकृत टूरिज्म सर्किट

Latehar: पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बेतला रेंज स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में बुधवार को टाइगर फाउंडेशन’ की वार्षिक समीक्षा बैठक का भव्य...

टूरिज्म सर्किट

Latehar: पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बेतला रेंज स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में बुधवार को टाइगर फाउंडेशन’ की वार्षिक समीक्षा बैठक का भव्य आयोजन किया गया. फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि सह पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, राज्य के वरिष्ठ वन अधिकारी, लातेहार और पलामू के डीसी जिला परिषद सदस्य तथा टाइगर फाउंडेशन के सम्मानित सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे. बैठक के दौरान बीते वित्तीय वर्ष की उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया और पीटीआर में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन विकास तथा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आगामी वर्ष की कार्य योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ.

बैठक के मुख्य बिंदु एवं महत्वपूर्ण निर्णय

– पलामू टाइगर रिजर्व के ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए बाघों के पुनर्वास और उनकी संख्या बढ़ाने हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करने की योजनाओं की समीक्षा की गई. क्षेत्र में भारतीय बायसन (गौर) के पुनर्वास की प्रगति पर चर्चा हुई, ताकि शाकाहारी जीवों के संतुलन और विविधता को मजबूत किया जा सके.

– ऐतिहासिक पलामू किला का संरक्षण और पर्यटन विकास पीटीआर क्षेत्र के भीतर स्थित ऐतिहासिक पलामू किला (नया और पुराना किला) के संरक्षण, जीर्णोद्धार और पर्यटकों के लिए इसके सुंदरीकरण पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया, जिससे वन संरक्षण के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत का भी प्रचार-प्रसार हो सके.

– पर्यटकों को आकर्षित करने और क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘टाइगर सफारी’ की स्थापना की तैयारियों पर चर्चा की गई. आने वाले समय में बेतला, टाइगर सफारी, ऐतिहासिक पलामू किला और महुआडांड़ भेड़िया अभयारण्य को आपस में जोड़कर एक एकीकृत ‘नया टूरिज्म सर्किट’ विकसित किया जाएगा.

– कोर एरिया से गांवों के स्वेच्छापूर्ण पुनर्वास और विस्थापन की प्रक्रिया को गति देने पर चर्चा हुई, ताकि वन्यजीवों के लिए निर्बाध और सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराया जा सके.

– विस्थापित होने वाले ग्रामीण परिवारों को पारदर्शी, बेहतर और समयबद्ध पुनर्वास सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया.

– आधुनिक तकनीक और डेटा-संचालित नवाचार मानव-हाथी द्वंद्व नियंत्रण मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने में इन्नोबॉक्स तकनीक के सफल और प्रभावी परिणामों की सराहना की गई.

– महुआ खाद्य एवं महुआ आधारित स्थानीय उत्पादों के माध्यम से ग्रामीणों को सीधा रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि आजीविका सुदृढ़ हो और वनों पर उनकी निर्भरता कम हो सके.

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