Giridih: जिले के विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठने जा रहा है. झारखंड सरकार ने गिरिडीह-डुमरी रोड स्थित पीरटांड़ क्षेत्र में झारखंड और बिहार के सबसे बड़े चिड़ियाघर के निर्माण को मंजूरी दे दी है. करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को झारखंड कैबिनेट की स्वीकृति मिल चुकी है. यह मेगा जैविक उद्यान लगभग 396.22 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जो क्षेत्रफल के लिहाज से झारखंड और बिहार का सबसे बड़ा चिड़ियाघर होगा.
इस परियोजना के लिए नगर विकास एवं आवास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रयासरत थे. वन एवं पर्यावरण विभाग ने भी इस ड्रीम प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है. मास्टर प्लान के अनुसार चिड़ियाघर के लिए 333.38 हेक्टेयर वन भूमि और 62.84 हेक्टेयर अधिग्रहित भूमि चिह्नित की गई है. वर्तमान में झारखंड का सबसे बड़ा चिड़ियाघर रांची के ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान है, जो 104 हेक्टेयर में फैला हुआ है. वहीं बिहार में पटना जू और अररिया में निर्माणाधीन नया चिड़ियाघर भी क्षेत्रफल के मामले में इससे छोटा है. ऐसे में पीरटांड़ का यह जैविक उद्यान पूरे झारखंड और बिहार का सबसे बड़ा वन्यजीव संरक्षण केंद्र बन जाएगा.
देश-विदेश के दुर्लभ वन्यजीव होंगे आकर्षण
वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) मनीष तिवारी के अनुसार, चिड़ियाघर में देश और विदेश के कई दुर्लभ वन्यजीवों एवं पक्षियों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप रखा जाएगा. यहां आने वाले पर्यटक रॉयल बंगाल टाइगर, हाथी, तेंदुआ, लेपर्ड कैट, जंगली बिल्ली, सियार, लोमड़ी, धारीदार लकड़बग्घा, हिमालयी काला भालू, स्लॉथ भालू (रीछ), दरियाई घोड़ा (हिप्पो), भारतीय गौर (बाइसन), चीतल, सांभर, काला हिरण, नीलगाय, काकड़, गंगा घड़ियाल, शुतुरमुर्ग, एम्बू, भारतीय मोर तथा तीतर कुल के विभिन्न पक्षियों को बेहद करीब से देख सकेंगे. उन्होंने बताया कि रॉयल बंगाल टाइगर, गंगा घड़ियाल और भालू जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और प्रजनन के लिए विशेष बाड़े तथा आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. साथ ही यह चिड़ियाघर वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा, जहां स्कूली छात्र, शोधार्थी और प्रकृति प्रेमी अध्ययन एवं शोध कर सकेंगे.
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
पीरटांड़ में बनने वाला यह चिड़ियाघर राष्ट्रीय राजमार्ग-114ए से सीधे जुड़ा होगा, जिससे झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए यहां पहुंचना बेहद आसान होगा. इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल पारसनाथ और मधुबन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए भी यह नया पर्यटन केंद्र आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा. धार्मिक पर्यटन के साथ वन्यजीव और प्रकृति पर्यटन का अनूठा संगम गिरिडीह को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा.
स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
नगर विकास एवं आवास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से गिरिडीह की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा. होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, गाइड सेवा, कैटरिंग, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों में व्यापार बढ़ेगा. इससे जिले में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा और गिरिडीह राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित होगा. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और वन विभाग मास्टर प्लान के अनुरूप निर्माण प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटे हैं. परियोजना पूरी होने के बाद यह जैविक उद्यान न केवल झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाएगा.
ALSO READ : पलामू : बालू, ईंट और क्रिनकल लदे वाहनों पर CO व हुसैनाबाद पुलिस का शिकंजा, तीन वाहन जब्त
