Ranchi: शिक्षा और अनुशासन के केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले मैक्लुस्कीगंज स्थित आर्णघ गर्ल्स हॉस्टल’ में शनिवार उत्साह देखने को मिला. यह अवसर था झारखंड हाई कोर्ट केजस्टिस दीपक रौशन के साथ एक विशेष प्रेरणादायक संवाद का. इस सत्र ने न केवल छात्राओं का मनोबल बढ़ाया, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों से लड़ने के लिए एक नई दृष्टि भी प्रदान की.
कार्यक्रम की शुरुआत तब हुई जब माननीय जस्टिस दीपक रौशन हॉस्टल परिसर पहुंचे. वहां रहने वाली छात्राओं ने बड़े ही उत्साह और गर्मजोशी के साथ बुके भेंट कर उनका स्वागत किया. यह हॉस्टल विशेष रूप से डॉन बॉस्को एकेडमी और जेनेट एकेडमी की छात्राओं का निवास स्थान है, जहां दोनों ही विद्यालयों की छात्राओं ने इस संवाद सत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
जीवन के अनुभवों से दी सफलता की सीख
अपने संबोधन के दौरान जस्टिस रौशन एक जज की औपचारिकता से हटकर एक अभिभावक और मार्गदर्शक की भूमिका में नज़र आए. उन्होंने अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए छात्राओं को बताया कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती.उन्होंने चार मुख्य स्तंभों पर जोर दिया.
– निरंतर प्रयास: कभी हार न मानने की प्रवृत्ति.
– अनुशासन: समय और ऊर्जा का सही प्रबंधन.
– आत्मविश्वास: स्वयं की क्षमताओं पर अडिग विश्वास.
– दृढ़ इच्छाशक्ति:कठिन समय में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना
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संवाद से बढ़ी जिज्ञासा: सवाल-जवाब का सत्र
इस कार्यक्रम का सबसे जीवंत हिस्सा वह रहा जब छात्राओं को जस्टिस से सीधे प्रश्न पूछने का अवसर मिला. छात्राओं ने केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर करियर, भविष्य की योजनाएं, न्याय व्यवस्था और जीवन के संघर्षों से जुड़े कई रोचक सवाल पूछे. जस्टिस रौशन ने भी बड़ी ही सहजता और सरल उदाहरणों के साथ उनकी हर जिज्ञासा को शांत किया, जिससे छात्राओं में एक नया आत्मविश्वास देखने को मिला.
शिक्षा के साथ खेल भी है जरूरी
जस्टिस ने इस अवसर पर छात्राओं के बीच खेलकूद की सामग्री का वितरण भी किया. उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि केवल किताबी कीड़ा बनना पूर्ण विकास नहीं है.उन्होंने कहा एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है.पढ़ाई के साथ शारीरिक गतिविधियां आपके व्यक्तित्व को समग्र बनाती हैं.
