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हजारीबाग: जबरा गांव में वन भूमि पर निर्माण कार्य का मामला गरमाया, अवैध कब्जे का आरोप, सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध

Hazaribagh: मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के जबरा गांव में वन विभाग की भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध सड़क निर्माण को लेकर विवाद...

Hazaribagh:  मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के जबरा गांव में वन विभाग की भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है. गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) हजारीबाग को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने तथा निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की भूमि पर नियमों को दरकिनार कर सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिससे जंगल और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है.

वन विभाग के प्लॉट संख्या-78 पर निर्माण का आरोप

ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया है कि मौजा जबरा, थाना संख्या-154 के अंतर्गत आने वाले वन विभाग के प्लॉट संख्या-78 पर कुछ लोगों द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा है. ग्रामीणों का दावा है कि यह भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और यहां पूर्व में बड़ी संख्या में साल एवं सखुआ के पेड़ मौजूद थे. ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए कई पेड़ों को उखाड़ा गया तथा वन क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाया गया है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वन संपदा को और अधिक क्षति पहुंच सकती है.

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ग्राम सभा की अनुमति पर उठे सवाल

मामले में सबसे बड़ा विवाद ग्राम सभा की कथित स्वीकृति को लेकर सामने आया है. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य से जुड़े लोगों ने दावा किया है कि ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया है. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में गांव में कभी कोई ग्राम सभा आयोजित ही नहीं हुई. उनका आरोप है कि न तो ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी गई और न ही किसी बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई. ऐसे में ग्राम सभा की स्वीकृति का दावा संदेहास्पद प्रतीत होता है. ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि जाली हस्ताक्षर अथवा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एनओसी प्राप्त की गई हो सकती है. उन्होंने प्रशासन से इस पहलू की भी गहन जांच कराने की मांग की है.

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निजी लाभ के लिए सड़क निर्माण की आशंका

ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर सड़क बनाई जा रही है, वहां आसपास कोई बड़ी आबादी नहीं है. इसके अलावा उस क्षेत्र में न तो कोई श्मशान घाट, कब्रिस्तान, सार्वजनिक संस्थान अथवा ऐसा कोई स्थल है, जहां आम लोगों की सुविधा के लिए सड़क निर्माण की आवश्यकता महसूस की जाए. इसी कारण ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि सड़क निर्माण सार्वजनिक हित के बजाय निजी लाभ को ध्यान में रखकर कराया जा रहा है. उनका कहना है कि यदि सड़क निर्माण का उद्देश्य जनहित होता तो इसकी जानकारी गांव के लोगों को अवश्य होती और ग्राम सभा में इस पर चर्चा भी की जाती.

वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग

आवेदन में ग्रामीणों ने जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित अवैध निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने तथा वन विभाग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है. साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई है. ग्रामीणों का कहना है कि वन भूमि केवल सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है. ऐसे में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या निर्माण को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. ग्रामीणों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदन की प्रतिलिपि हजारीबाग सांसद को भी भेजी है. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सकेगी और वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई होगी.

पर्यावरण संरक्षण को लेकर ग्रामीणों की चिंता

ग्रामीणों ने कहा कि जंगल क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए खतरा बनती जा रही है. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण और कब्जे को रोका जाए. ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग और प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता है, तो इससे न केवल वन क्षेत्र प्रभावित होगा बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है. फिलहाल ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं.

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