Suryakant kamal

Chatra : जिले के बहुचर्चित खनन एवं राजस्व घोटाला मामले ने नया मोड़ ले लिया है. शिवपुर-कठौतिया रेलवे लाइन निर्माण परियोजना से जुड़े इस मामले में अब करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग की परतें खुलने लगी हैं. जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो द्वारा सदर थाना को भेजे गए विस्तृत शिकायत पत्र और निर्माण एजेंसी इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद पुलिसिया जांच तेज हो गई है. डीएमओ द्वारा सदर थाना को भेजे गए पत्र के अनुसार शिवपुर-कठौतिया रेलवे लाइन निर्माण कार्य का मुख्य ठेका रांची के इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के पास है, लेकिन कंपनी ने मिट्टी उठाव समेत अन्य निर्माण कार्य मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन को पेटी कांट्रैक्ट के रूप में दे दिया था. इसी का लाभ उठाते हुए बिहार के गया जी के मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन ने 45 लाख 50 हजार घन मीटर मिट्टी खनिज के उठाव के बाद उसके रायल्टी के स्वामित्व प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर इरकॉन से भुगतान लेने की प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन इसी बीच जांच के दौरान सामने आया कि जिन स्वामित्व प्रमाण पत्रों के आधार पर राजा कंस्ट्रक्शन के द्वारा इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड से भुगतान का दावा किया गया, वे जिला खनन कार्यालय से निर्गत ही नहीं हुए थे.
पत्राचार से खुला राज, फर्जी लेटर हेड से लेकर नकली निर्गत पंजी तक का हुआ उपयोग
डीएमओ मनोज टोप्पो ने पत्र में उल्लेख किया है,कि इरकॉन के मुख्य महाप्रबंधक मोहन सिंह के साथ हुए पत्राचार और उनके द्वारा कार्यालय को उपलब्ध कराए गए अभिलेखीय जांच में पाया गया कि राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा कार्य एजेंसी को सौंपे गए मिट्टी उठाव कार्य के स्वामित्व प्रमाण पत्र में दर्ज कई पत्रांक और तिथियां फर्जी है. इतना ही नहीं, डीएमओ ने मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन पर जिला खनन कार्यालय के नाम से कथित रूप से फर्जी लेटरहेड, मोहर, हस्ताक्षर तथा निर्गत पंजी तक तैयार कर इसका दुरुपयोग करने की बात कही है. डीएमओ के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि जिन पत्रों को आधार बनाकर राजा कंस्ट्रक्शन के द्वारा मिट्टी खनिज के स्वामित्व का दावा किया गया, उनका रिकॉर्ड जिला खनन कार्यालय के अभिलेखों में मौजूद ही नहीं है. शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों के माध्यम से लगभग 45.50 लाख घन मीटर मिट्टी खनिज के रायल्टी का भुगतान लेने का अवैध तरिके से प्रयास किया गया है.
महज राजस्व हानि का नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की जालसाजी और संस्थागत धोखाधड़ी का है गंभीर मामला
डीएमओ ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर फर्जीवाड़े व घोटाले की अनुमानित वित्तीय राशि करीब 26 करोड़ रुपये से अधिक है. खनन विभाग का मानना है कि यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की जालसाजी और संस्थागत धोखाधड़ी का गंभीर प्रकरण है। घोटाले के षड्यंत्र के सनसनीखेज खुलासे के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है. प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे प्रकरण की समीक्षा की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित फर्जीवाड़े में किन-किन लोगों की भूमिका रही है. इतना ही नहीं जिला प्रशासन राजस्व घोटाले के इस साजिश के मास्टरमाइंड की भी तलाश कर रही है.
16 फर्जी चालानों के 65 पन्नों का पुलिस को सौंपा साक्ष्य
दस्तावेज़ के अनुसार, मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड को मिट्टी खनिज के स्वामित्व भुगतान के लिए कुल 16 स्वामित्व प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए थे. जिसे जिला खनन कार्यालय की जांच में फर्जी बताया गया है. राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा सौंपे गए कथित फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों का विवरण समेत करीब 65 पन्नों का साक्ष्य भी डीएमओ नें सदर थाना को सौंपा है. इन सभी प्रमाण पत्रों में दर्शाई गई मिट्टी खनिज की कुल मात्रा 45,50,000 (पैंतालीस लाख पचास हजार) घनमीटर है.
क्रमांक, पत्रांक, तिथि, मात्रा (घनमीटर में)
– 01 741 दिनांक 29.08.2023 1,75,000
– 02 748 दिनांक 31.08.2023 2,50,000
– 03 821 दिनांक 15.09.2023 2,50,000
– 04 815 दिनांक 14.09.2023 2,75,000
– 05 890 दिनांक 30.09.2023 4,00,000
– 06 1539 दिनांक 12.12.2023 4 30,000
– 07 321 दिनांक 03.04.2024 5,30,000
– 08 480 दिनांक 17.05.2024 4,15,000
– 09 696 दिनांक 29.06.2024 2,50,000
– 10 571 दिनांक 18.06.2025 1,50,000
– 11 594 दिनांक 24.06.2025 3,10,000
– 12 611 दिनांक 01.07.2025 2,75,000
– 13 615 दिनांक 03.07.2025 1,50,000
– 14 619 दिनांक 04.07.2025 1,25,000
– 15 656 दिनांक 18.07.2025 3,15,000
– 16 662 दिनांक 21.07.2025 2,50,000
जांच में क्या आया सामने
जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो द्वारा सदर थाना को भेजे गए शिकायत पत्र में कहा गया है कि उपरोक्त पत्रों का सत्यापन जिला खनन कार्यालय के अभिलेखों से किया गया, जिसमें पाया गया कि ये पत्र कार्यालय से निर्गत नहीं हुए थे. आरोप है कि जिला खनन कार्यालय के नाम से फर्जी लेटरहेड, मोहर, हस्ताक्षर और निर्गत पंजी का उपयोग कर स्वामित्व प्रमाण पत्र तैयार किए गए तथा इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड से भुगतान प्राप्त करने का प्रयास किया गया.
हरहाल में वसूली जाएगी राजस्व की राशि : DMO
इधर डीएमओ मनोज टोप्पो ने पुलिस से दोषी एजेंसी और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि राजस्व की क्षति हुई है तो संबंधित एजेंसियों से हर हाल में उसकी वसूली सुनिश्चित की जाएगी. सरकार को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले एजेंसी और उसके कर्मियों को निश्चित तौर पर कठोर रूप से सबक सिखाई जाएगी.
हर पहलू की होगी गहनता से जांच, बक्से नहीं जाएंगे जालसाज : थाना प्रभारी
वहीं सदर थाना प्रभारी सह पुलिस निरीक्षक अवधेश सिंह ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेलवे लाइन निर्माण कार्य में लगी मेसर्स इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की शिकायत पर उसकी सहायक कंपनी राजा कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. उन्होंने बताया कि हमें खनन विभाग की ओर से भी पत्र प्राप्त हुआ है. प्राप्त शिकायत और दस्तावेज के आधार पर हर संभावित पहलू की गहनता से जांच की जा रही है. दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित एजेंसियों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन सहित सभी बिंदुओं की जांच के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.
जांच पर टिकी सबकी निगाहें ?
बहरहाल मामले की जांच फिलहाल चतरा की सदर थाना पुलिस द्वारा की जा रही है और पुलिस दस्तावेजों की सत्यता, भुगतान प्रक्रिया तथा संबंधित एजेंसियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। ऐसे में अब लोगों की निगाहें इस हाई-प्रोफाइल मामले की पुलिसिया जांच पर ही टिकी है. कहा जा रहा है कि जिला खनन पदाधिकारी द्वारा एजेंसियों पर लगाए गए सभी आरोप सही साबित होते हैं तो यह चतरा के इतिहास में सबसे बड़े कथित चालान और राजस्व घोटाले के षड्यंत्रों में से एक माना जा सकता है. क्योंकि जो आकलन लगाए जा रहे हैं उसके अनुसार प्रथम दृष्टया यह करीब 26 करोड़ से ज्यादा के राजस्व घोटाले का है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आंकड़ा जांच के साथ बढ़कर अप्रत्याशित आंकड़े को छू सकता है.
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