बोकारो: DVC के स्थापना दिवस पर बोले जितेंद्र यादव, विकास के नाम पर खुद को ठगा महसूस कर रहे विस्थापित

Bermo: बेरमो अनुमंडल अंतर्गत बोकारो थर्मल के विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय समिति डीवीसी केंद्रीय युवा कमेटी के अध्यक्ष सह गिरिडीह सांसद प्रतिनिधि...

DVC स्थापना दिवस पर विस्थापितों की उपेक्षा पर बोले जितेंद्र यादव
DVC स्थापना दिवस पर विस्थापितों की उपेक्षा पर बोले जितेंद्र यादव

Bermo: बेरमो अनुमंडल अंतर्गत बोकारो थर्मल के विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय समिति डीवीसी केंद्रीय युवा कमेटी के अध्यक्ष सह गिरिडीह सांसद प्रतिनिधि जितेंद्र यादव ने डीवीसी के 79वें स्थापना दिवस पर मंगलवार को आक्रोश प्रकट करते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने एक ओर जहां स्थापना दिवस को लेकर डीवीसी प्रबंधन को शुभकामनाएं दीं, वहीं दूसरी ओर विस्थापितों के दर्द को उजागर करते हुए कहा कि आज के दिन को विस्थापित परिवार पूरे डीवीसी में बलिदान दिवस के रूप में देखते हैं. विस्थापित नेता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने क्षेत्र और देश के विकास के लिए अपनी उपजाऊ जमीनें डीवीसी को सौंप दी थीं, लेकिन डीवीसी ने सिर्फ अपना विकास किया और यहां के मूल विस्थापित परिवारों को उनके हाल पर छोड़ दिया, जिससे उनका आज तक कोई सर्वांगीण विकास नहीं हो पाया.

‘नया बस्ती आज भी बदहाल, बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं विस्थापित गांव’

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डीवीसी का पुनर्वासित गांव नया बस्ती इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसका स्थापना के करीब 78 वर्षों बाद भी कोई समुचित विकास नहीं हो पाया है. आज भी वहां के विस्थापितों की जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) नहीं हो सका है. इसके अलावा डीवीसी के अगल-बगल जितने भी विस्थापित गांव हैं, उन्हें प्रबंधन की ओर से न तो शुद्ध पेयजल, न निर्बाध बिजली और न ही बेहतर सड़क व नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाई हैं. उन्होंने कहा कि डीवीसी का CSR फंड भी विस्थापित क्षेत्रों में धरातल पर नजर नहीं आता. डीवीसी प्रबंधन का पूरा ध्यान सिर्फ बिजली पैदा करने और अपने पावर प्लांट चलाने तक ही सीमित रह गया है, जिसके कारण आज के समय में यहां के सीधे-साधे विस्थापित खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.

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