Ranchi: भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों का राष्ट्रीय फलक पर विस्तार अक्सर चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव में जो लकीर खींची है, उसने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है. 17 सीटों पर पहली बार चुनाव लड़कर करीब 0.5 प्रतिशत वोट हासिल करना और 10 सीटों पर मुख्यधारा के दलों को पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाना, महज एक आंकड़ा नहीं है. यह इस बात का संकेत है कि ‘झारखंडी अस्मिता’ और ‘आदिवासी अधिकार’ की गूंज अब छोटानागपुर के पठार से निकलकर ब्रह्मपुत्र की वादियों तक पहुंच चुकी है.
शानदार आगाज: प्रयोग नहीं, दूरगामी रणनीति
असम में जेएमएम की एंट्री को केवल एक चुनावी प्रयोग के तौर पर नहीं देखा जा सकता. पार्टी ने हेमंत सोरेन के चेहरे और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे को असम के ‘चाय बागान’ श्रमिकों और वहां बसे झारखंडी मूल के आदिवासियों के बीच सफलतापूर्वक स्थापित किया है. 10 सीटों पर तीसरे स्थान पर रहना यह दर्शाता है, कि जेएमएम ने वहां एक मजबूत ‘वोट बैंक’ की नींव रख दी है, जो भविष्य में निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
विपक्ष के लिए कीवी और असम में केसरिया को चुनौती
पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने जेएमएम की भूमिका को कीवी फल से जोड़कर एक बड़ा संदेश दिया. जिस तरह कीवी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाता है, उसी तरह जेएमएम अब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष (इंडिया गठबंधन) को मजबूती देने के लिए तैयार है. असम के नतीजों ने सिद्ध कर दिया है, कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में जेएमएम, भाजपा के विजय रथ को रोकने की क्षमता रखती है.
परिसीमन और चुनौतियों के बीच उदय
सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि असम में परिसीमन’ के जरिए सीटों का समीकरण बदला गया, ताकि चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सके. इसके बावजूद जेएमएम का प्रदर्शन सराहनीय रहा. 10 सीटों पर तीसरे नंबर पर आना यह बताता है कि पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा के बीच एक तीसरे विकल्प की जगह बना ली है. हेमंत सोरेन अब केवल झारखंड के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि देश के बड़े आदिवासी नेता के रूप में उभरे हैं, जिनकी स्वीकार्यता झारखंड के बाहर भी बढ़ी है.
2029 और राष्ट्रीय विस्तार
पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल शुरुआत है. आदिवासी मुद्दों पर संघर्ष और तेज होगा. झारखंड में भी संभावित परिसीमन को लेकर जेएमएम सतर्क है. भट्टाचार्य के अनुसार, पार्टी का लक्ष्य अब 2029 तक खुद को एक ऐसी शक्ति के रूप में स्थापित करना है, जिसके बिना केंद्र की सत्ता का समीकरण अधूरा रहे.
रिपोर्ट: रवि भारती
यह भी पढ़ें: ऑल इंडिया ओपन कराटे चैंपियनशिप में झारखंड का दबदबा, 27 स्वर्ण के साथ ओवरऑल चैंपियन
