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भांग NDPS एक्ट के दायरे से बाहर- HC ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला, रद्द की 7 साल की सजा

Vinit Abha Upadhyay Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित कैनबिस (गांजा)...

ओपन जेलों

Vinit Abha Upadhyay

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित कैनबिस (गांजा) की परिभाषा में नहीं आती है. कोर्ट ने कहा कि भांग को जानबूझकर इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है. इस टिप्पणी के साथ ही जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने एक आरोपी की सजा और दोषसिद्धि को पूरी तरह से रद्द कर दिया है. दरअसल निचली अदालत ने एक आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(B), 20(B) और 11(B) के तहत दोषी ठहराते हुए 7 साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी. सुनील सिंह ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी. मामला पुलिस गश्ती दल द्वारा की गई एक कार्रवाई से जुड़ा है. जिसमें पुलिस ने बस स्टैंड के पास से एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा था. पकडे गए व्यक्ति के हाथ में एक भारी सूटकेस था. गवाहों की मौजूदगी में जब सूटकेस की तलाशी ली गई, तो उसमें से करीब 11 किलोग्राम वजन के गांजे के साथ 12 पॉलिथीन पैकेट बरामद होने का दावा किया गया. इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था और ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया था.

चरस और गांजा प्रतिबंधित, भांग कानून से बाहर

अपीलकर्ता के वकील ने अदालत में यह दलील दी कि जब्त किया गया पदार्थ असल में गांजा नहीं बल्कि भांग था. जो एनडीपीएस NDPS अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में नहीं आता. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कानून की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि कानून के तहत चरस और गांजा को प्रतिबंधित माना गया है लेकिन भांग को इसमें शामिल नहीं किया गया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं पेश किया गया जो यह साबित करे कि भांग को चरस, गांजे या गांजे की पत्तियों से तैयार किया जाता है. चूंकि गांजे की पत्तियों और बीजों को गांजे की कानूनी परिभाषा से बाहर रखा गया है, इसलिए भांग को प्रतिबंधित ड्रग नहीं माना जा सकता.

राज्य सरकार ने भांग को प्रतिबंधित नहीं किया है

कोर्ट ने यह भी पाया कि राज्य सरकार ने भी एनडीपीएस  NDPS के तहत ऐसा कोई नियम या अधिसूचना जारी नहीं की है. जिसमें भांग को प्रतिबंधित पदार्थ घोषित किया गया हो. इस मामले में आरोपी पर भांग के पौधे की खेती करने का कोई आरोप नहीं है. उसके पास से जो पदार्थ मिला वह अंतत भांग पाया गया. जिसे एनडीपीएस NDPS एक्ट के दायरे से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है. सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी की अपील स्वीकार कर ली और उसे बरी कर दिया.

 

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