सिविल कोर्ट से कागजात चोरी का मामला: अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पर आरोप, पुलिस से शिकायत

Bokaro: बोकारो सिविल कोर्ट से कागजात चोरी और साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है. अधिवक्ता रंजीत कुमार उर्फ रंजीत गिरी ने...

Bokaro: बोकारो सिविल कोर्ट से कागजात चोरी और साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है. अधिवक्ता रंजीत कुमार उर्फ रंजीत गिरी ने बीएस सिटी थाना में लिखित शिकायत देकर बोकारो जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष वासुदेव गोस्वामी और प्रदीप कुमार झा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. घटना 30 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है.

क्या है पूरा मामला?

अधिवक्ता रंजीत कुमार के अनुसार, घटना 30 अप्रैल 2026 की है. सुबह करीब 10 बजे वह सिविल कोर्ट के सेंट्रल हॉल (टेबल नंबर 42/A) में अपनी एक मुवक्किल रानी मंडल के लिए गहना रिलीज करवाने संबंधी याचिका और वकालतनामा तैयार कर रहे थे. जब वह कुछ देर के लिए अपनी सीट से हटे, तभी उनकी अनुपस्थिति में वह याचिका और वकालतनामा वहां से गायब हो गया.

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सोशल मीडिया और अखबार के जरिए मिली जानकारी

अधिवक्ता ने बताया कि उसी दिन सोशल मीडिया पर एक खबर प्रसारित की गई कि रंजीत कुमार को उनके दुराचारपूर्ण आचरण के कारण बोकारो जिला अधिवक्ता संघ से एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है. अगले दिन एक मई 2026 को यही खबर स्थानीय दैनिक समाचार पत्र में भी छपी.

चोरी का आरोप और साजिश का दावा

रंजीत कुमार का दावा है कि जब उन्होंने मामले की तहकीकात की, तो उन्हें पता चला कि उनकी मेज से वह याचिका बासुदेव गोस्वामी और प्रदीप कुमार झा नामक व्यक्तियों ने चोरी की थी. उनका आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर एक ‘आपातकालीन बैठक’ का ढोंग रचा गया. बिना अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति के, उन्हें निलंबित करने का एकतरफा निर्णय लिया गया. समाज में उनकी छवि खराब करने के लिए भ्रामक प्रेस रिलीज जारी की गई.

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भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना बना कारण?

शिकायत पत्र में अधिवक्ता ने उल्लेख किया है कि वह संघ में हुए कथित एक करोड़ 20 लाख रुपये के इनकम टैक्स घोटाले, बिजली बिल घोटाले और सीट आवंटन में अनियमितताओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं. उनका मानना है कि इसी रंजिश के कारण उनके खिलाफ यह फर्जीवाड़ा किया गया है.

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