Chakradharpur: पश्चिम सिंहभूम जिले की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और चाईबासा सदर अस्पताल की बदहाली को लेकर भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने गहरा रोष प्रकट किया है. उन्होंने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, कि सदर अस्पताल अब केवल ‘रेफरल सेंटर’ बनकर रह गया है, जहां गरीब मरीजों को इलाज के बजाय सिर्फ निराशा हाथ लग रही है. पांडे ने बयान जारी कर कहा, कि चक्रधरपुर और अन्य दूर-दराज क्षेत्रों से गरीब आदिवासी मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में सदर अस्पताल आते हैं. लेकिन यहां के चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मरीजों को सीधे जमशेदपुर (MGM) रेफर कर देते हैं.
अस्पताल की स्थिति भयावह: पूर्व जिला उपाध्यक्ष
पूर्व जिला उपाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि एक गरीब मरीज, जिसके पास संसाधन नहीं हैं, वह गंभीर स्थिति में जमशेदपुर की दूरी कैसे तय करेगा? अस्पताल की दुर्दशा पर प्रहार करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि सदर अस्पताल में बिजली कटने पर जनरेटर तक की व्यवस्था नहीं है. उन्होंने दावा किया कि अस्पताल की स्थिति इतनी भयावह है कि प्रसव (डिलीवरी) जैसे संवेदनशील कार्य भी टॉर्च की रोशनी में करने पड़ रहे हैं. यह जच्चा और बच्चा दोनों की जान के साथ खिलवाड़ है.

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के दावे सिर्फ भाषणबाजी
मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CS) डॉ. जुझार माझी के कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए पांडे ने कहा, कि उनके आने से सुधार की जो उम्मीद जगी थी, वह धूमिल हो चुकी है. CS द्वारा संसाधनों की कमी का रोना रोना और यह कहना कि “सुधार में बरसों लगेंगे”, उनकी विफलता को दर्शाता है. साथ ही, उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के दावों को धरातल से परे और केवल भाषणबाजी करार दिया. पवन शंकर पांडे ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों से आग्रह किया है, कि पश्चिम सिंहभूम जैसे आदिवासी बहुल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए. सदर अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति और बुनियादी बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. मरीजों को बेवजह रेफर करने की प्रक्रिया पर रोक लगे, ताकि गरीबों को उनके अपने जिले में ही उचित उपचार मिल सके. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो जनता के हितों के लिए उग्र आंदोलन किया जाएगा.
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