Seraikela: नीमडीह प्रखंड के लुपुंगडीह पंचायत अंतर्गत उगडीह मौजा में आदिवासी महिला की खतियानी जमीन पर अवैध कब्जा कर मकान बना लिया गया. पीड़िता पिंकी सिंह वर्षों से दखल-दिहानी के लिए भटक रही है, लेकिन अंचल कार्यालय से उसे न्याय नहीं मिला. मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक पहुंचने के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है.
खतियान में दर्ज है जमीन
उगडीह मौजा के खाता संख्या 64, प्लॉट संख्या 17 में 13 डिसमिल एवं प्लॉट 18 में 11 डिसमिल जमीन पिंकी सिंह के पूर्वजों के नाम पर खतियान में अंकित है. यह आदिवासी रैयती जमीन है. आरोप है कि उक्त जमीन के कुछ अंश पर सुबोध प्रसाद सिंह एवं राकेश सिंह द्वारा अतिक्रमण कर पक्का मकान का निर्माण कर लिया गया है. पिंकी सिंह ने कई वर्षों से जमीन की दखल-दिहानी के लिए अंचल कार्यालय सहित संबंधित विभागों को आवेदन दिया, लेकिन उसे अपना अधिकार नहीं मिला.
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जनजाति आयोग ने लिया संज्ञान
थक-हारकर पिंकी सिंह ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को पत्र लिखकर इस संबंध में अवगत कराया. आयोग ने इस विषय का संज्ञान लेते हुए समेकित जनजाति विकास अभिकरण, सरायकेला-खरसावां को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया. समेकित जनजाति विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक ने जिला के पुलिस अधीक्षक, चांडिल के अनुमंडल पदाधिकारी एवं नीमडीह के अंचल अधिकारी को पत्र प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए अविलम्ब प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया. नीमडीह के अंचल अधिकारी ने इस विषय पर राजस्व उप निरीक्षक एवं अंचल अमीन से जांच कराई. संबंधित कर्मचारियों ने स्थल जांच कर रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि की है. रिपोर्ट में माना गया कि खतियानी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है.
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सवालों के घेरे में अंचलाधिकारी
अब सवाल उठ रहा है कि जब जमीन खतियान में दर्ज है और अतिक्रमण साबित हो चुका है, तो सालों से सीओ दखल-दिहानी क्यों नहीं दिला पाए? CNT एक्ट के तहत आदिवासी जमीन का गैर-आदिवासी द्वारा हस्तांतरण अवैध है. पीड़िता ने मांग की है कि अवैध निर्माण तोड़कर जमीन पर कब्जा दिलाया जाए और दोषियों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हो. आईटीडीए ने 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है.
