Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज दोपहर विशेष सेवा विमान से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए रवाना हो गए. कहने को तो यह दौरा आदिवासी अस्मिता और ‘सरना धर्म कोड’ की पुरानी मांग को लेकर है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके निहितार्थ कहीं अधिक गहरे और रणनीतिक माने जा रहे हैं. मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब देश की सियासत एक बड़े मोड़ पर खड़ी है.
सरना धर्म कोड: राष्ट्रपति के समक्ष रखेंगे राज्य की भावना
दिल्ली रवानगी से पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी इस यात्रा का मुख्य एजेंडा जनगणना में ‘सरना धर्म कोड’ को शामिल करने की मांग है. वे इस मुद्दे पर महामहिम राष्ट्रपति और अन्य केंद्रीय नेताओं से मुलाकात करेंगे. झारखंड विधानसभा से पारित होने के बावजूद यह मुद्दा केंद्र के पास लंबित है, जिसे लेकर सोरेन एक बार फिर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
पांच राज्यों के चुनावी नतीजे और विपक्षी एकजुटता
मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल सामाजिक मुद्दों तक सीमित नहीं है. सूत्रों के अनुसार, 4 मई को आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम इस दौरे के केंद्र में हैं. नतीजों के ठीक पहले और बाद में दिल्ली में उनकी मौजूदगी कई बड़े विपक्षी नेताओं के साथ भविष्य की रणनीति बनाने का संकेत दे रही है. झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन की मजबूती के बीच, हेमंत सोरेन राष्ट्रीय स्तर पर अपनी और अपनी पार्टी की भूमिका को और विस्तार देना चाहते हैं.
राजनीतिक गलियारों में हलचल
सोरेन का यह दौरा ‘एक तीर से दो निशाने’ जैसा है. एक तरफ वे सरना कोड के जरिए अपने कोर वोट बैंक (आदिवासी समाज) को यह संदेश दे रहे हैं, कि वे उनके अधिकारों के लिए दिल्ली तक लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों में अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं. मुख्यमंत्री 5 मई को रांची वापस लौटेंगे. तब तक दिल्ली में होने वाली उनकी मुलाकातों और चुनावी नतीजों के बाद उठने वाले राजनीतिक तूफान पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी.
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