Ranchi: यात्री ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी से त्रस्त आम जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है. ‘रेल यात्री संघर्ष समिति’ ने रेलवे की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपने आंदोलन को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया है. विधायक सरयू राय के नेतृत्व में हुई बैठक में तय हुआ, कि अब यह संघर्ष केवल चक्रधरपुर मंडल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका विस्तार खड़गपुर मंडल तक किया जाएगा.
आंदोलन की नई रणनीति और हस्ताक्षर अभियान
विधायक सरयू राय ने स्पष्ट किया कि ट्रेनों के विलंब होने से न केवल यात्रियों का समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि रेलवे की प्रतिष्ठा भी धूमिल हो रही है. आंदोलन को धार देने के लिए समिति ने आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की है.
• 17 मई: साकची गोलचक्कर पर हस्ताक्षर अभियान.
• 18 मई: स्टार टॉकीज के पास विरोध प्रदर्शन.
• 19 मई: मानगो में अभियान.
• 24 मई: खड़गपुर मंडल के घाटशिला में विशाल हस्ताक्षर अभियान.
वंदे भारत भी लेट, रेलवे के दावों की खुली पोल
बैठक में आंकड़ों के साथ रेलवे के ‘झूठ’ का पर्दाफाश किया गया. सरयू राय ने बताया कि चांडिल तक समय पर आने वाली ट्रेनें टाटानगर पहुंचते-पहुंचते घंटों लेट हो रही हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि जब ‘वंदे भारत’ जैसी प्रीमियम ट्रेन 30 मिनट विलंब से चल रही है, तो अन्य ट्रेनों की स्थिति की कल्पना सहज ही की जा सकती है. उन्होंने सवाल उठाया कि आदित्यपुर से सलगाजुड़ी के बीच तीसरी लाइन का काम लंबित रहने का खामियाजा यात्री कब तक भुगतेंगे?
मुख्यमंत्री तक पहुंची गूंज, रेलवे बोर्ड पर दबाव
समिति के संयोजक शिवशंकर सिंह और जदयू जिलाध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने बताया कि इस जन-आंदोलन की धमक झारखंड के मुख्यमंत्री तक पहुंची है, जिन्होंने स्वयं रेल मंत्री को ट्वीट कर इस समस्या पर चिंता जताई है. बैठक में शामिल आजसू, मारवाड़ी सम्मेलन और अन्य संगठनों ने एक स्वर में कहा कि रेलवे के पास संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रबंधन की इच्छाशक्ति का अभाव है.
सुझाव और संकल्प
बैठक में आए प्रस्तावों के अनुसार, यदि सुधार नहीं हुआ तो आंदोलनकारी पटरियों पर बैठने और रेलवे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने से भी पीछे नहीं हटेंगे.
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