हजारीबाग की सुरंगों से तेज होगा कोयला परिवहन, धनबाद से बाढ़ NTPC तक 250 km दूरी और 5 घंटे की बचत

Hazaribagh : पूर्व मध्य रेल के गुरपा-गझंडी घाट रेलखंड पर वर्षों से बनी ऊंचाई की बाधा अब दूर हो गई है. इस...

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Hazaribagh : पूर्व मध्य रेल के गुरपा-गझंडी घाट रेलखंड पर वर्षों से बनी ऊंचाई की बाधा अब दूर हो गई है. इस सेक्शन की तीन सुरंगों में जरूरी तकनीकी बदलाव और ऊंचाई बढ़ाने का काम पूरा होने के बाद आधुनिक BOBR वैगनों से कोयले की ढुलाई शुरू कर दी गई है. इससे हजारीबाग स्थित NTPC की बड़कागांव और केरेडारी स्थित कोयला खदानों और धनबाद रेल मंडल से NTPC के बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकेगी.

तीन सुरंगों में किया गया तकनीकी बदलाव

करीब 120 वर्ष पुराने इस रेलमार्ग की तीन सुरंगों की ऊंचाई कम होने के कारण BOBR वैगनों का संचालन संभव नहीं था. रेलवे ने सुरंगों के पुनर्रचना और आवश्यक संरचनात्मक बदलाव की योजना तैयार कर काम शुरू किया. जनवरी 2026 में शुरू हुआ कार्य जून में पूरा कर लिया गया. काम पूरा होने के बाद पहले खाली और फिर कोयले से भरे BOBR रेक को अप और डाउन दोनों रेल लाइनों पर चलाकर परीक्षण किया गया. सफल ट्रायल के बाद अब इस मार्ग पर नियमित मालगाड़ियों का परिचालन शुरू हो गया है.

धनबाद से बाढ़ तक घटेगी दूरी

गुरपा-गझंडी मार्ग के इस्तेमाल से धनबाद से बाढ़ स्थित NTPC संयंत्र तक जाने वाले रेक को पहले की तुलना में करीब 250 किलोमीटर कम दूरी तय करनी होगी. रेल अधिकारियों के अनुसार इससे मालगाड़ियों के सफर में लगभग पांच घंटे तक की कमी आएगी. इसका सीधा लाभ कोयला आपूर्ति की गति पर पड़ेगा. इस नए परिचालन मार्ग से बाढ़, बरौनी और सलाकाटी स्थित NTPC बिजली संयंत्रों तक कोयला भेजना अधिक सुगम होगा. अब तक धनबाद मंडल से BOBR रेक प्रधानखांटा-आसनसोल-झाझा रेलमार्ग से भेजे जाते थे. नए रास्ते से दूरी कम होने के साथ माल ढलाई की क्षमता में भी सुधार की उम्मीद है.

खाली रेक भी इसी मार्ग से लौटेंगे

इस व्यवस्था का फायदा केवल लोडेड रेक को नहीं मिलेगा. कोयला खाली करने के बाद BOBR वैगन इसी मार्ग से वापस धनबाद मंडल पहुंच सकेंगे. इससे रेक के टर्नअराउंड टाइम में कमी आएगी और कम समय में अधिक रेक उपलब्ध हो सकेंगे. परिणामस्वरूप धनबाद क्षेत्र में कोयला लोडिंग की क्षमता बढ़ने की संभावना है.

IIT-ISM का मिला तकनीकी सहयोग

रेलवे के अनुसार परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया गया. महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह की पहल पर पूर्व मध्य रेल ने IIT-ISM धनबाद के तकनीकी सहयोग से सुरंगों की संरचना में जरूरी बदलाव कराया. आधुनिक मालवाहक वैगनों का इस ऐतिहासिक रेलखंड पर संचालन शुरू होना रेलवे के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

1906-07 में शुरू हुई थी ग्रैंड कार्ड लाइन

गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन ऐतिहासिक ग्रैंड कार्ड रेल लाइन का हिस्सा है. इस रेलमार्ग की शुरुआत वर्ष 1906-07 में लॉर्ड मिंटो के कार्यकाल के दौरान हुई थी. एक सदी से अधिक पुराने इस रेलखंड पर आधुनिक मालवाहक वैगनों के लिए सुरंगों को अनुकूल बनाने से अब यह मार्ग कोयला परिवहन के लिहाज से और महत्वपूर्ण हो गया है.

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