Ranchi: झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में नए जोश और विजन का संचार करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भविष्य के नीति-निर्धारकों को लोक सेवा का असली पाठ पढ़ाया. मंगलवार को रांची स्थित लोक भवन में जब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट की, तो यह मुलाकात महज एक औपचारिक संवाद नहीं रही, बल्कि एक विकसित झारखंड के निर्माण का रोडमैप बन गई. राज्यपाल ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि एक आईएएस अधिकारी की असली पहचान फाइलों से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसके व्यवहार और संवेदनशीलता से होती है.
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राज्यहित को रखें सर्वोपरि
संवाद के दौरान राज्यपाल ने अधिकारियों को याद दिलाया कि उनके हर निर्णय की प्राथमिकता जनहित और राज्यहित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध है. राज्य को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने के लिए अधिकारियों को समर्पित भाव और नई ऊर्जा के साथ काम करने की आवश्यकता है.
फील्ड विजिट और जन-संवाद पर जोर
प्रशिक्षु अधिकारियों को जमीनी हकीकत से रूबरू होने की सलाह देते हुए राज्यपाल ने कहा कि बंद कमरों के बजाय नियमित क्षेत्र भ्रमण पर ध्यान दें. उन्होंने अधिकारियों को आम लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि शासन और जनता के बीच की दूरी को पाटा जा सके.
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कार्य और व्यवहार ही असली पहचान
प्रशासनिक सेवा की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में किसी व्यक्ति की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके कार्य और व्यवहार से बनती है. अधिकारियों को कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व को आत्मसात करने का निर्देश दिया.
