हजारीबाग यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में शैक्षणिक योग्यता पर विवाद, फिर भी असिस्टेंट प्रोफेसर की सेवा बहाल

Hazaribagh: यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, हजारीबाग की असिस्टेंट प्रोफेसर लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...

Hazaribagh: यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, हजारीबाग की असिस्टेंट प्रोफेसर लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसके बावजूद वर्षों से लंबित जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने के आधार पर विनोबा भावे विश्वविद्यालय ने उनकी सेवा बहाल कर दी है. विश्वविद्यालय ने लक्ष्मी सिंह के अनुबंध की अवधि बढ़ाते हुए उनकी सेवा 2 मार्च 2026 से 31 जनवरी 2027 तक जारी रखने का आदेश दिया है.

अवधि विस्तार से इनकार के बाद शुरू किया था धरना

इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने लक्ष्मी सिंह के अनुबंध का अवधि विस्तार करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया था. मामले को देखते हुए विश्वविद्यालय ने एक विशेष समीक्षा समिति का गठन किया. समिति में मिथिलेश कुमार सिंह, सादिक रजा और जगेंद्र सिंह को शामिल किया गया था.

जांच रिपोर्ट आने तक सेवा बहाल रखने की अनुशंसा

विशेष समीक्षा समिति ने वर्ष 2022 में गठित जांच समिति की रिपोर्ट आने तक लक्ष्मी सिंह की सेवा बहाल रखने की अनुशंसा की थी. इसी अनुशंसा के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी सेवा अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया. हालांकि विश्वविद्यालय के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनकी सेवा वर्ष 2022 में गठित जांच समिति की रिपोर्ट से प्रभावित होगी. यानी जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय को उनकी सेवा को लेकर आगे निर्णय लेना पड़ सकता है.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया तक पहुंची थी शिकायत

लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता को लेकर शिकायत बार काउंसिल ऑफ इंडिया तक पहुंची थी. शिकायत के बाद काउंसिल ने विश्वविद्यालय को मामले की जांच कराने के लिए पत्र लिखा था. इसके बाद विश्वविद्यालय ने 25 जून 2022 को एक जांच समिति गठित की थी. लेकिन समिति के गठन के करीब चार वर्ष बाद भी उसकी रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है.

लंबित जांच के बीच सेवा बहाली पर उठे सवाल

लंबित जांच रिपोर्ट के बीच सेवा बहाल किए जाने को लेकर विश्वविद्यालय के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं. जानकार सूत्रों का दावा है कि मामले में विश्वविद्यालय स्तर पर सक्रिय एक समूह लक्ष्मी सिंह के पक्ष में लगातार पैरवी कर रहा है. सूत्रों का यह भी दावा है कि पूरे प्रकरण में कुलपति को सभी तथ्यों से अवगत कराए बिना आदेश जारी कराने का प्रयास किया गया.

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए जरूरी होगा कि लंबित जांच समिति की रिपोर्ट जल्द सामने लाकर मामले की स्थिति स्पष्ट करे, ताकि लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यता और सेवा विस्तार को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति साफ हो सके.
ALSO READ: पलामू: गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा को चाईबासा से मेदिनीनगर सेंट्रल जेल किया गया शिफ्ट, रिया की मां ने जताई अनहोनी की आशंका

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *