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देश हुआ नक्सल प्रभाव से मुक्त: अंतिम जिला चाईबासा भी नक्सल मुक्त घोषित

Ranchi: केंद्रीय गृह मंत्रालय की 31 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक ऐतिहासिक...

Country freed from Naxal influence: Last district Chaibasa also declared Naxal-free

Ranchi: केंद्रीय गृह मंत्रालय की 31 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है. देश का एकमात्र बचा नक्सल प्रभावित झारखंड का जिला चाईबासा भी अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है. गृह मंत्रालय की ताजा समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, अब देश के किसी भी राज्य का कोई भी जिला उग्रवाद या नक्सल प्रभाव की श्रेणी में नहीं बचा है. भारत के किसी भी जिले को अब ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न’ (चिंताजनक जिले) की श्रेणी में भी नहीं रखा गया है. गृह मंत्रालय ने इससे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट झारखंड के गृह सचिव और डीजीपी को भेज दी है.

चाईबासा और अन्य जिलों की स्थिति में सुधार का सफर

  • वर्ष 2024 की स्थिति: गृह मंत्रालय की 2024 की रिपोर्ट में देश के 5 राज्यों (छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा) के 12 जिले अति नक्सल प्रभावित श्रेणी में शामिल थे, जिनमें झारखंड का चाईबासा भी शामिल था.
  • 09 फरवरी 2026 की रिपोर्ट: इस रिपोर्ट के तहत चाईबासा को अति नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से हटाकर सामान्य नक्सल प्रभावित जिलों की श्रेणी में डाला गया था. उस समय अति नक्सल प्रभावित श्रेणी में केवल छत्तीसगढ़ के तीन जिले (बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा) बचे थे.
  • 31 जुलाई 2026 (ताजा रिपोर्ट): नवीनतम रिपोर्ट में देश के सभी जिलों को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित कर दिया गया है.

‘लीगेसी एवं थ्रस्ट जिला’ श्रेणी क्या है?

यद्यपि जिले नक्सल मुक्त हो चुके हैं, लेकिन लंबे समय तक उग्रवाद से प्रभावित रहने के कारण यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वहां दोबारा नक्सली गतिविधियां न पनपें. इसलिए, गृह मंत्रालय ने चाईबासा सहित पूर्व प्रभावित जिलों को ‘लीगेसी एवं थ्रस्ट जिले की श्रेणी में रखा है.इस श्रेणी में शामिल जिलों को केंद्र सरकार द्वारा लगातार सहायता और वित्तीय अनुदान मिलता रहेगा. इसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास, सुरक्षा संबंधी कार्य और सामाजिक आर्थिक पहलों को जारी रखना है, ताकि उग्रवाद की वापसी को हमेशा के लिए रोका जा सके.

राष्ट्रीय नीति और 2015 की समीक्षा

गृह मंत्रालय के अनुसार, नक्सली समस्या के स्थाई समाधान के लिए वर्ष 2015 में एक राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना की शुरुआत की गई थी. विभिन्न सुरक्षा एवं विकास मापदंडों के आधार पर की गई बहुस्तरीय समीक्षाओं के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि देश में अब कोई भी जिला उग्रवाद से प्रभावित नहीं है.

देश के 9 राज्यों में शेष बचे 38 ‘लीगेसी एवं थ्रस्ट’ जिले

  • वर्तमान में देश के 9 राज्यों के कुल 38 जिलों को सुरक्षा और विकास सहायता जारी रखने के लिए ‘लीगेसी एवं थ्रस्ट’ श्रेणी में रखा गया है.
  • छत्तीसगढ़: बस्तर, बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, धमतरी, कबीरधाम, खैरागढ़ छुईखदान, गंडई, कोंडागांव, राजनंदगांव, मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी, गरियाबंद, सुकमा, दंतेवाड़ा.
  • ओडिशा: बौद्ध, सुंदरगढ़, कालाहांडी, कोरापुट, मलकानगिरी, नबरंगपुर, नुआपाड़ा, रायगड़ा, कंधमाल.
  • बिहार: औरंगाबाद, गया, जमुई, लखीसराय.
  • झारखंड: चाईबासा, बोकारो, चतरा, लातेहार.
  • मध्य प्रदेश: बालाघाट, मंडला.
  • महाराष्ट्र: गढ़चिरौली, गोंदिया.
  • तेलंगाना: भद्राद्री-कोठागुडेम, मुलगु.
  • आंध्र प्रदेश: अल्लूरी सीतारामराजू.
  • पश्चिम बंगाल: झाड़ग्राम.

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