Ranchi: झारखंड में गिरते लिंगानुपात को संतुलित करने और कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने लिंग जांच पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से जुड़े राज्य समुचित प्राधिकार का पुनर्गठन कर दिया है. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के आदेश पर इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है. यह पुनर्गठन गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम, 1994 (PC-PNDT एक्ट) के तहत किया गया है.
नए पुनर्गठित प्राधिकार का स्वरूप इस प्रकार होगा
इस उच्च स्तरीय प्राधिकार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें प्रशासनिक, सामाजिक और कानूनी विंग के दिग्गजों को शामिल किया गया है. पुनर्गठित प्राधिकार की संरचना इस प्रकार है.
– अध्यक्ष: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक
– सदस्य: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष या उनकी ओर से नामित प्रतिनिधि.
– सदस्य: विधि (कानून) विभाग द्वारा नामित विशेष प्रतिनिधि.
क्यों अहम है यह कदम?
झारखंड के कई इलाकों में लिंगानुपात की स्थिति चिंताजनक रही है. अवैध रूप से प्रसव पूर्व लिंग जांच करने वाले सेंटरों और भ्रूण हत्या करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए इस प्राधिकार के पास व्यापक शक्तियां होती हैं. इस पुनर्गठन से अब कानून को धरातल पर उतारने और दोषियों को सजा दिलाने में तेजी आएगी.
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क्या है PC-PNDT एक्ट?
गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 देश का एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण कानून है. इसका सीधा मकसद गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच करने वाले डॉक्टरों, क्लीनिकों और इसमें शामिल माता-पिता पर कानूनी शिकंजा कसना है, ताकि बेटियों को जन्म लेने से पहले ही न मारा जा सके. राज्य में चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों की सख्त मॉनिटरिंग करना है. पीसी-पीएनडीटी एक्ट के नियमों का उल्लंघन करने वाले सेंटरों का पंजीकरण तुरंत सस्पेंड या रद्द करना और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाना और गिरते लिंगानुपात को सुधारने के लिए नीतियां तैयार करना.


