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टेलीग्राम-व्हाट्सऐप ट्रेडिंग जाल में फंसा सीआरपीएफ कर्मी, 2 लाख की हो गई साइबर ठगी

– प्रॉफिट का झांसा देकर किस्तों में वसूले पैसे, ठगों ने राशि डूबने का डर दिखाया, पीड़ित देता चला गया पैसा Ranchi:...

– प्रॉफिट का झांसा देकर किस्तों में वसूले पैसे, ठगों ने राशि डूबने का डर दिखाया, पीड़ित देता चला गया पैसा

Ranchi: राजधानी में साइबर अपराधियों का जाल एक बार फिर सामने आया है, जहां ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर सीआरपीएफ कर्मी से करीब 2 लाख रुपए की ठगी कर ली गई. मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित को बार-बार प्रॉफिट और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम जमा कराने के लिए दबाव बनाया गया और अंततः पैसा वापस नहीं किया गया. गुमला जिले के बसिया निवासी चंदन कुमार (33 वर्ष), जो वर्तमान में सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर, तिरिल आश्रम, धुर्वा (रांची) में कार्यरत हैं, साइबर ठगी का शिकार हो गए. उन्होंने रांची के साइबर थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई है.

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टेलीग्राम से शुरू हुआ खेल, व्हाट्सऐप पर फंसा जाल

पीड़ित के अनुसार, उन्हें पहले एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया, जहां ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया. इसके बाद उन्हें एक लिंक के माध्यम से व्हाट्सऐप पर जोड़ा गया, जहां से पूरा ठगी का खेल संचालित हुआ. 10 मार्च 2026 को चंदन कुमार ने आरोपियों के कहने पर पहले 50,000 रुपये यूपीआई के माध्यम से भेजे. कुछ ही देर बाद उन्हें बताया गया कि उनका पैसा बढ़कर 3.20 लाख रुपये हो गया है. इसके बाद राशि निकालने के नाम पर पहले 70,000 रुपये मांगे गए (40,000 + 30,000 दो खातों में). फिर अगले दिन 80,000 रुपये ट्रेडिंग फीस के नाम पर वसूले गए. डर और लालच के बीच पीड़ित ने कुल मिलाकर करीब 2 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए, लेकिन रकम वापस नहीं मिली.

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फर्जी यूपीआई और दबाव की रणनीति

आरोपियों ने पीड़ित को बार-बार यह कहकर डराया कि अगर फीस नहीं दी, तो पूरा पैसा डूब जाएगा. इसी दबाव में पीड़ित ने ameena736@ybl जैसे यूपीआई आईडी पर पैसे ट्रांसफर किए. हर बार पैसे देने के बाद “एक घंटे में रिफंड” का झांसा दिया गया, जो कभी पूरा नहीं हुआ. जब पैसा वापस नहीं आया, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद उन्होंने मोबाइल फॉर्मेट कर ऐप्स हटाए.

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