दनुआ घाटी: झारखंड का डेथ जोन, जहां हर मोड़ पर बिछी है मौत

Ranchi: खौफनाक मोड़, अंधा ढलान और सड़कों पर बिखरा खून, यह किसी डरावनी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि हजारीबाग के चौपारण स्थित...

Ranchi: खौफनाक मोड़, अंधा ढलान और सड़कों पर बिखरा खून, यह किसी डरावनी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि हजारीबाग के चौपारण स्थित दनुआ घाटी की कड़वी हकीकत है. एनएच-19 पर स्थित यह घाटी आज झारखंड के लिए किलर वैली बन चुकी है.

यहां सफर करने वाला हर मुसाफिर अपनी हथेली पर जान लेकर चलता है, क्योंकि दनुआ घाटी में कब कौन सा भारी वाहन काल बनकर पीछे से रौंद दे, इसका कोई ठिकाना नहीं. सरकारी फाइलों में दर्ज ब्लैक स्पॉट अब इंसानी जिंदगियों को निगलने वाला मौत का कुआं बन चुका है.

रक्तरंजित होती दनुआ घाटी

दनुआ घाटी में हादसों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन वर्षों में यहां मौतों का ग्राफ गिरने के बजाय और ऊपर चढ़ा है. कुल मिलाकर पिछले तीन साल में करीब 195 से ज्यादा मौतें केवल इस 10 से 12 किलोमीटर के दायरे में हुई हैं.

वर्ष 2023 की स्थिति

वर्ष 2023 में घाटी में लगभग 140 से अधिक छोटे-बड़े हादसे हुए, जिनमें 58 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए.

वर्ष 2024 में बढ़े हादसे

वर्ष 2024 में हादसों की संख्या में इजाफा हुआ और मरने वालों का आंकड़ा 65 के पार पहुंच गया. दर्जनों परिवार इस साल सड़क पर ही उजड़ गए.

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2025 से अप्रैल 2026 तक भयावह हालात

वर्ष 2025 से अप्रैल 2026 तक के पिछले 16 महीनों में दनुआ घाटी ने अपनी भयावहता की सारी हदें पार कर दी हैं. अब तक 72 से ज्यादा लोग काल के गाल में समा चुके हैं.

क्यों खतरनाक है दनुआ घाटी

दनुआ घाटी की भौगोलिक और तकनीकी स्थितियां इसे बेहद खतरनाक बनाती हैं, जहां हर मोड़ पर दुर्घटना का खतरा बना रहता है.

जानलेवा अंधे मोड़ और ढलान

घाटी की संरचना ऐसी है कि यहां लगभग 7 किलोमीटर तक लगातार तीव्र ढलान है. ढलान के साथ-साथ सड़क पर कई एस आकार के अंधे मोड़ हैं. भारी वाहन ढलान पर नियंत्रण खो देते हैं और ब्रेक फेल होने के कारण आगे चल रही छोटी गाड़ियों को कुचल देते हैं.

ओवरलोडिंग और खराब ब्रेक

हजारीबाग की ओर से आने वाले अधिकांश ट्रक ओवरलोडेड होते हैं. ढलान पर लगातार ब्रेक लगाने से ब्रेक ड्रम गर्म होकर काम करना बंद कर देते हैं. ऐसे में भारी वाहन अनियंत्रित होकर या तो खाई में गिर जाते हैं या सामने से आ रहे वाहनों से टकरा जाते हैं.

अधूरे सुरक्षा उपाय

प्रशासन ने यहां कई बार ब्लैक स्पॉट को सुधारने का दावा किया, लेकिन सड़कों के किनारे लगे क्रैश बैरियर कमजोर हैं. कई जगह संकेतक बोर्ड नहीं हैं और रात में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है, जिससे बाहर से आने वाले चालक घाटी की गंभीरता को समझ नहीं पाते.

तकनीकी खामियां

इंजीनियरिंग के अनुसार मोड़ों पर सड़क का एक हिस्सा थोड़ा ऊंचा होना चाहिए, ताकि तेज रफ्तार वाहन बाहर की ओर न पलटें. लेकिन दनुआ घाटी के कई मोड़ों पर यह तकनीकी संतुलन नहीं है, जो दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है.

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