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DC ने कैफे को ‘मॉडल दीदी कैफे’ के रूप में विकसित करने का दिया भरोसा

Pakur: महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में पाकुड़ जिले ने एक अनूठी मिसाल पेश की है. समाहरणालय परिसर के बाहर संचालित...

Pakur:  महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में पाकुड़ जिले ने एक अनूठी मिसाल पेश की है. समाहरणालय परिसर के बाहर संचालित ‘पलाश आजीविका दीदी कैफे’ आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. जेएसएलपीएस (JSLPS) के सहयोग से संचालित यह कैफे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें सफल उद्यमी के रूप में पहचान दिला रहा है.

गृहणी से सफल उद्यमी बनने तक का सफर

कैफे की मुख्य संचालिका मधुमिता सिंह ने बताया कि दो वर्ष पहले तक वह एक सामान्य गृहणी थीं. परिवार की आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया. प्रशासन और जेएसएलपीएस के सहयोग से शुरू हुआ यह कैफे आज उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा बन गया है. उन्होंने कहा कि जिस आय की कल्पना पहले पूरे वर्ष में भी नहीं की जाती थी, वह आज मासिक आमदनी के रूप में प्राप्त हो रही है.

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सरकारी सहयोग से बढ़ा कारोबार

मधुमिता सिंह ने बताया कि शुरुआत में कैफे का कारोबार सीमित था, लेकिन प्रशासनिक पहल के बाद जिले के विभिन्न विभागों में आयोजित बैठकों और कार्यक्रमों के लिए भोजन एवं नाश्ते की आपूर्ति की जिम्मेदारी कैफे को मिलने लगी. इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा और वर्तमान में कैफे का मासिक टर्नओवर 3 से 4 लाख रुपये तक पहुंच गया है. कैफे में छह महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है, जबकि अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

बेहतर कार्य के लिए कई बार मिला सम्मान

कैफे की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली और महिलाओं के सशक्तिकरण में योगदान को देखते हुए इसे डीडीसी स्तर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है. यह कैफे जिले में स्वयं सहायता समूह आधारित सफल उद्यमिता का उदाहरण बनकर उभरा है. हाल ही में उपायुक्त ने कैफे का निरीक्षण किया. इस दौरान संचालिकाओं ने किचन और स्टोर रूम की कमी की समस्या रखी. उपायुक्त ने इन समस्याओं के समाधान का आश्वासन देते हुए कहा कि यह झारखंड का प्रमुख दीदी कैफे है और इसे प्रशासन की ओर से ‘मॉडल दीदी कैफे’ के रूप में विकसित किया जाएगा.

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश

मधुमिता सिंह ने जिले की अन्य महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि यदि परिवार के सदस्य मिलकर कार्य करें तो आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और बच्चों को बेहतर शिक्षा एवं भविष्य मिल सकता है. उन्होंने महिलाओं से घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया. पलाश आजीविका दीदी कैफे में किफायती दर पर शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाता है. यहां आने वाले लोग भोजन का स्वाद लेने के साथ-साथ महिलाओं के आत्मनिर्भरता अभियान को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं.

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