धनबाद मुनीडीह कोल वाशरी हादसा: 400 की मजदूरी और अधूरी रह गई बहन की मुराद, सालभर पहले खोया था जवान बेटा अब पति भी चले गए

Dhanbad: बीसीसीएलके मुनीडीह कोल वाशरी स्थित सैलरी लोडिंग प्वाइंट पर शनिवार को हुए भीषण हादसे ने पूरे कोयलांचल को गमगीन कर दिया...

Dhanbad: बीसीसीएलके मुनीडीह कोल वाशरी स्थित सैलरी लोडिंग प्वाइंट पर शनिवार को हुए भीषण हादसे ने पूरे कोयलांचल को गमगीन कर दिया है. मलबे में दबने से चार असंगठित लोडिंग मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद से इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल है. इस हादसे ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं उन गरीब परिवारों के भविष्य पर अंधेरा छा गया है जिन्होंने अपना एकमात्र सहारा खो दिया है.

पिछले साल बेटा खोया, अब पति चले गए

हादसे में जान गंवाने वाले दीपक बाउरी के घर से उठ रही चीखें पत्थर दिल को भी पिघला देने वाली थीं दीपक की पत्नी सावित्री देवी बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़ीं. उन्हें संभाल रहे देवर अशोक बाउरी की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. सावित्री देवी ने सुबकते हुए कहा, भगवान को तनिक भी रहम नहीं आया. पिछले साल इलाज के अभाव में जवान बेटा खोया था, इस साल पति भी साथ छोड़ गए. अब एक जवान बेटी है, आखिर किसके भरोसे जीवन कटेगा? उन्होंने मुझसे झूठ बोलकर कि वे ननद के घर राजगंज जा रहे हैं, काम पर चले गए. मुझे क्या पता था कि वे चुपके-चुपके मुझे हमेशा के लिए छोड़कर चले जाएंगे.

400 की मजदूरी और अधूरी रह गई बहन की मुराद

दीपक की बहन अनिता देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने बताया कि दीपक ने उनसे वादा किया था कि काम खत्म होने के बाद वह पूजा में उनके घर आएगा. अनिता ने बिलखते हुए कहा, मेरे भाई ने कहा था कि लोडिंग कार्य में बहुत दिनों बाद नंबर आया है, आज 400 की मजदूरी मिलेगी. अगर वह मेरे पास घर आ गया होता, तो आज जिंदा होता.

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प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ शवों के साथ धरना

हादसे के बाद से ही आक्रोशित मजदूरों और मृतक के परिजनों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. शवों को घटनास्थल पर ही रखकर परिजन और साथी मजदूर धरने पर बैठ गए हैं.

लोगों का मांग है कि मृतकों के आश्रितों को अविलंब स्थाई नौकरी दी जाए, पीड़ित परिवारों को जीवन यापन के लिए सम्मानजनक आर्थिक सहायता दी जाए साथ ही घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए.

सुरक्षा के अभाव में हुआ हादसा

आंदोलनकारी मजदूरों का सीधा आरोप है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रबंधन की घोर लापरवाही है. मजदूरों का कहना है कि यदि लोडिंग प्वाइंट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते और खतरनाक हो चुके ढांचों की मरम्मत समय पर की गई होती, तो इन चार बेगुनाहों की जान नहीं जाती. जब तक मुआवजा और नियोजन की मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रखने का संकल्प लिया गया है. घटनास्थल पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. वहां मौजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि असंगठित मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है. भारी भरकम मुनाफे वाली कोल कंपनियों में आज भी मजदूर न्यूनतम सुरक्षा के बिना काम करने को मजबूर हैं.

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