Bokaro: बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के रेलवे के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए लगाया गया डिजिटल कोच इंडिकेटर डिस्प्ले सिस्टम तकनीकी रूप से चालू तो कर दिया गया है, लेकिन इसका असली उद्देश्य अब भी पूरा नहीं हो पा रहा है.
ट्रेन आने पर यात्रियों को खुद लगाना पड़ता है कोच का अंदाजा
स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने के समय यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है. कोच इंडिकेटर काम नहीं करने के कारण यात्रियों को अपने आरक्षित कोच की स्थिति का अंदाजा खुद लगाना पड़ता है.वहीं, स्टेशन प्रबंधन या पूछताछ केंद्र से भी कई बार स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती है. ट्रेन आते ही यात्री प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर दौड़ते नजर आते हैं, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है.
बुजुर्ग और महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी
इस अव्यवस्था का सबसे अधिक असर बुजुर्ग यात्रियों, पेंशनधारकों और महिला यात्रियों पर पड़ रहा है. घुटनों की समस्या से परेशान बुजुर्ग और गोद में बच्चों के साथ यात्रा कर रही महिलाएं भारी सामान लेकर प्लेटफॉर्म के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने को मजबूर हैं. कई बार आखिरी समय में अपने कोच तक पहुंचने की जल्दबाजी में यात्री चलती ट्रेन के साथ दौड़ने लगते हैं. इस दौरान गिरने और चोट लगने की घटनाओं का खतरा भी बना रहता है.
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यात्रियों ने रेल प्रशासन से जल्द सुधार की मांग की
स्थानीय जागरूक नागरिकों और परेशान यात्रियों ने रेल प्रशासन की इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है. यात्रियों की मांग है कि डिजिटल कोच इंडिकेटर सिस्टम में जल्द से जल्द ट्रेनों के समय और कोच की सटीक स्थिति की जानकारी अपडेट की जाए. यात्रियों का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं के नाम पर लगाए गए उपकरण तभी उपयोगी होंगे, जब उनका सही संचालन हो. रेल प्रशासन को इस समस्या का जल्द समाधान कर यात्रियों को रोज-रोज की परेशानी से राहत दिलानी चाहिए.
