Click Here

बोकारो में ग्रामीण रोजगार और आजीविका को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला, जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

Bokaro: जिला परिषद सभाकक्ष में बुधवार को ग्रामीण रोजगार, आजीविका एवं विकसित भारत के निर्माण की दिशा में प्रभावी क्रियान्वयन विषय पर...

Bokaro: जिला परिषद सभाकक्ष में बुधवार को ग्रामीण रोजगार, आजीविका एवं विकसित भारत के निर्माण की दिशा में प्रभावी क्रियान्वयन विषय पर जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. इसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी, मनरेगा पदाधिकारी एवं कर्मी तथा जिला स्तरीय टीम के सदस्य शामिल हुए.

मनरेगा की राज्य रैंकिंग में बोकारो दूसरे स्थान पर

कार्यशाला में बताया गया कि पिछले वर्ष मनरेगा के विभिन्न संकेतकों के आधार पर जारी राज्य स्तरीय समेकित रैंकिंग में बोकारो जिले को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है. अधिकारियों ने कहा कि जिले ने अपनी पिछली रैंकिंग में सुधार किया है. अब राज्य में प्रथम स्थान हासिल करने के लक्ष्य के साथ कार्य करने पर जोर दिया गया.

जल संरक्षण और आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता

उपायुक्त ने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक लाभ ग्रामीणों के जीवन में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने नई व्यवस्था के तहत जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में और स्कूल का पानी स्कूल में रहे, इस सोच के साथ प्रत्येक बूंद पानी का संरक्षण और सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए.

स्थानीय जरूरतों के अनुसार बनेगी कार्ययोजना

उपायुक्त ने अधिकारियों को अपने-अपने प्रखंड की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करने को कहा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने से पलायन रोकने में मदद मिलेगी. स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के आधार पर ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाए, जिनसे ग्रामीण परिवारों को लंबे समय तक लाभ मिल सके.

विकसित भारत जी-राम-जी के तहत नई व्यवस्था की जानकारी

कार्यशाला में मनरेगा से विकसित भारत जी-राम-जी में लागू नई व्यवस्था और प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई. बताया गया कि नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण श्रमिकों के लिए पूर्व के 100 दिनों की तुलना में 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान किया गया है. बुआई और फसल कटाई के समय 60 दिनों तक कार्य नहीं होने का प्रावधान है, जिसकी अवधि राज्य सरकार द्वारा घोषित की जाएगी. साथ ही मजदूरी का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में श्रमिकों के बैंक खाते में सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया. नई व्यवस्था के तहत 318 प्रकार के कार्यों और योजनाओं को शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य रोजगार सृजन के साथ गांवों में टिकाऊ और उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है.

पलायन रोकने पर भी जोर

उपायुक्त ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान विद्यालय, आंगनबाड़ी, जल स्रोत, सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं की जरूरतों को चिन्हित कर उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया. उन्होंने नई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों के बीच किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहने देने और उनकी शंकाओं का समाधान करने को भी कहा.

डीडीसी ने टीम को किया प्रोत्साहित

उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने कहा कि राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त करना पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है. उन्होंने प्रखंड और जिला स्तर की पूरी मनरेगा टीम को बधाई देते हुए अब राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ काम करने का आह्वान किया. उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों से नई व्यवस्था के प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझकर योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की अपील की.

बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारी और कर्मी सम्मानित

कार्यशाला के दौरान बेहतर कार्य और प्रदर्शन करने वाले प्रखंड विकास पदाधिकारियों, मनरेगा पदाधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. उन्हें योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर कार्य निष्पादन के लिए प्रोत्साहित किया गया.

 

ALSO READ: निर्माणाधीन 32 मंजिला इमारत की क्रेन से लटककर झारखंड के युवक ने की आत्महत्या

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *