Giridih:के सड़क नेटवर्क को नई दिशा देने वाली बहुप्रतीक्षित डुमरी-देवघर फोरलेन परियोजना अब धरातल पर उतरने की ओर तेजी से बढ़ रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के धनबाद डिवीजन ने गिरिडीह और देवघर के भू-अर्जन विभागों को भूमि अधिग्रहण के लिए अधियाचना भेज दी है, जबकि निर्माण एजेंसी के चयन हेतु टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा.
करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना
करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-114ए (NH-114A) को आधुनिक फोरलेन सड़क में तब्दील करेगी. यह मार्ग डुमरी मोड़ स्थित जीटी रोड से शुरू होकर पीरटांड़, पारसनाथ, गिरिडीह, बेंगाबाद, मधुपुर, सारठ और सारवां होते हुए देवघर तक जाएगा. सड़क के चौड़ीकरण और आधुनिकीकरण से न केवल आवागमन सुगम होगा बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी.

पर्यटन, व्यापार और तीर्थाटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
डुमरी-देवघर फोरलेन परियोजना को झारखंड के लिए एक गेमचेंजर माना जा रहा है. यह सड़क राज्य के प्रमुख धार्मिक, पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने का काम करेगी. विशेष रूप से देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, पारसनाथ पर्वत और गिरिडीह जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा. परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह देवघर एयरपोर्ट के समीप बन रही रिंग रोड और देवघर-बासुकीनाथ फोरलेन सड़क से भी जुड़ेगी. इससे हवाई यात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा. बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो जाएगी.
बाजार क्षेत्रों में बनेगा बाइपास, लोगों को मिलेगी राहत
फोरलेन परियोजना के तहत कई प्रमुख बाजार क्षेत्रों में बाइपास निर्माण का भी प्रस्ताव है. वर्तमान में बेंगाबाद, मधुपुर, सारठ और सारवां जैसे बाजारों से होकर गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण लगातार जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है. इसे देखते हुए इन क्षेत्रों में अलग बाइपास सड़क बनाई जाएगी ताकि लंबी दूरी के वाहन बाजार क्षेत्र में प्रवेश किए बिना अपने गंतव्य तक पहुंच सकें. विशेष रूप से मधुपुर में लगभग 14 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड बाइपास प्रस्तावित किया गया है. यह पूरी तरह नई भूमि पर विकसित होगा, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव कम होगा. अधिकारियों ने बताया कि बाइपास के डिजाइन तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि किसी भी आवासीय मकान या घनी आबादी वाले क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे. इससे भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याएं भी कम होने की संभावना है.
यात्रा समय में होगी भारी कमी
फोरलेन सड़क बनने के बाद झारखंड के विभिन्न शहरों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी. वर्तमान में खराब सड़क, संकरी लेन और बाजार क्षेत्रों में लगने वाले जाम के कारण लोगों को लंबी यात्रा करनी पड़ती है. लेकिन नई फोरलेन परियोजना के पूरा होने के बाद सड़क यात्रा का पूरा स्वरूप बदल जाएगा. अनुमान के अनुसार देवघर से रांची की दूरी लगभग तीन घंटे में तय की जा सकेगी. वहीं देवघर से गिरिडीह की यात्रा केवल 45 मिनट में पूरी हो जाएगी. पारसनाथ तक पहुंचने में करीब सवा घंटा और डुमरी तक पहुंचने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगेगा. इससे व्यवसायियों, छात्रों, कर्मचारियों और आम यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी.
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया जीवन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा. बेहतर सड़क संपर्क से उद्योग, व्यापार और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी. गिरिडीह, मधुपुर, सारठ और देवघर जैसे क्षेत्रों के उत्पाद आसानी से बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे. परिवहन लागत कम होने से व्यापारियों को भी लाभ होगा. इसके अलावा सड़क निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है. निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों, मशीन ऑपरेटरों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी इसका फायदा मिलेगा. परियोजना पूरी होने के बाद सड़क किनारे होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार होने की उम्मीद है.
सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी सड़क
एनएचएआई द्वारा विकसित की जाने वाली इस फोरलेन सड़क में आधुनिक सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा. सड़क पर बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था, सर्विस लेन, संकेतक बोर्ड, स्ट्रीट लाइट, दुर्घटना रोकथाम उपाय और आवश्यकतानुसार फ्लाईओवर तथा अंडरपास जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा.
झारखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी परियोजना
डुमरी-देवघर फोरलेन परियोजना को झारखंड की आधारभूत संरचना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यह परियोजना न केवल सड़क संपर्क को मजबूत करेगी बल्कि पर्यटन, तीर्थाटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी. भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया में तेजी को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा और आने वाले वर्षों में यह सड़क झारखंड की विकास यात्रा में एक नई पहचान बनेगी. स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस परियोजना का स्वागत किया है. उनका मानना है कि फोरलेन सड़क बनने से वर्षों पुरानी यातायात समस्याओं का समाधान होगा और गिरिडीह से लेकर देवघर तक के पूरे क्षेत्र को विकास की नई गति मिलेगी. आने वाले समय में यह मार्ग राज्य के सबसे महत्वपूर्ण सड़क गलियारों में से एक के रूप में उभरेगा.
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