Lifestyle Desk: आज, 5 अप्रैल को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ ईस्टर संडे मनाया जा रहा है. यह दिन गुड फ्राइडे के दुख को खुशियों और उत्सव में बदल देता है. मुख्य रूप से यह पर्व प्रभु यीशु मसीह के चमत्कारिक रूप से पुनर्जीवित होने की याद में मनाया जाता है और विश्वभर के ईसाई समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

दुख से खुशियों तक का अद्भुत सफर
मान्यताओं के अनुसार, जब यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया और उन्हें दफनाया गया, उन्होंने मृत्यु को हराया. तीसरे दिन चमत्कारिक रूप से वे जीवित हो उठे.
यही दिन बुराई पर अच्छाई और मृत्यु पर जीवन की सर्वोत्तम जीत का प्रतीक बन गया है, जिसे पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है.
विश्वास और आशा का प्रतीक
यीशु मसीह ने सूली पर चढ़ाए जाने से पहले ही अपने पुनरुत्थान की भविष्यवाणी कर दी थी. मृत्यु के बाद जब वे वापस लौटे और अपना वादा पूरा किया, तो लोगों का ईश्वर पर विश्वास और भी मजबूत हो गया. संक्षेप में, ईस्टर संडे यह दिखाता है कि हर दुख अंततः खुशी में बदल सकता है.
गुड फ्राइडे से भी बड़ा महत्व
ईस्टर संडे का महत्व ईसाई धर्म में गुड फ्राइडे से भी अधिक माना जाता है. यह पर्व केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि जीवन में गलतियों और कठिनाइयों को सुधारने, पापों से मुक्ति पाने और नई उम्मीद और विश्वास जगाने का संदेश देता है.
यीशु का पुनर्जीवन: ईश्वर का प्रेम
यीशु का पुनर्जीवित होना ईश्वर के प्रेम, उनकी अपार शक्ति और उनके वादों की सच्चाई का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है. यही दिन लोगों को ईश्वर के करीब लाता है और आज भी उनके दिलों में सच्ची उम्मीद जगाता है.
रंगीन अंडों की परंपरा

ईस्टर पर अंडे सजाने की परंपरा सदियों पुरानी है. इस सप्ताह में मीट और शराब से परहेज किया जाता है, लेकिन अंडों को रंगने की शुरुआत 13वीं शताब्दी से हुई. उस समय अंडों को पवित्र माना जाता था और उन्हें नए जीवन और नई शुरुआत का प्रतीक मानकर सजाया जाता था.
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अंडों में छुपा पुनर्जन्म
ईस्टर में अंडे सजाने की परम्परा का गहरा अर्थ है, जैसे अंडे का कठोर खोल टूटकर नया जीवन बाहर आता है, वैसे ही यीशु मसीह ने मृत्यु को हराकर पुनर्जीवित होकर नया जीवन प्राप्त किया.
लाल अंडों का ऐतिहासिक संदेश

कुछ पुराने धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अंडों को लाल रंग से सजाना शुभ माना जाता है. यह लाल रंग उस पवित्र रक्त का प्रतीक है जो यीशु मसीह ने सूली पर बहाया था. आज भी पूरी दुनिया में लोग इस परंपरा को उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाते हैं, जो उन्हें उनके धर्म और इतिहास से जोड़े रखती है.



