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एल नीनो अलर्ट: बचाव को लेकर पशुपालकों को किया गया जागरूक, चला विशेष अभियान

Giridih: बदलती जलवायु परिस्थितियों और एल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभावों को देखते हुए गिरिडीह जिला प्रशासन ने पशुपालकों को सतर्क...

गिरिडीह में पशुपालकों को चेताया, हीट स्ट्रेस और जल संकट से बचाव के बताए उपाय
गिरिडीह में पशुपालकों को चेताया, हीट स्ट्रेस और जल संकट से बचाव के बताए उपाय

Giridih: बदलती जलवायु परिस्थितियों और एल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभावों को देखते हुए गिरिडीह जिला प्रशासन ने पशुपालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. उपायुक्त श्री रामनिवास यादव के निर्देश पर जिला गव्य विकास कार्यालय की ओर से शुक्रवार को बेंगाबाद प्रखंड के पतरोडीह गांव में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया. अभियान का उद्देश्य बढ़ते तापमान, संभावित जल संकट और हीट स्ट्रेस जैसी परिस्थितियों से पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन के प्रति जागरूक करना था.

एल नीनो के प्रभावों की दी जानकारी

अभियान के दौरान जिला गव्य विकास पदाधिकारी ने बताया कि एल नीनो के प्रभाव से तापमान में असामान्य वृद्धि, वर्षा में कमी और जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाई जाएं, तो इन संभावित खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है.

पशुपालकों को दिए गए आवश्यक सुझाव

पशुपालकों को सलाह दी गई कि वे अपने पशुओं के लिए हर समय पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ एवं ठंडे पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करें. इसके अलावा संतुलित एवं पौष्टिक आहार के साथ नियमित रूप से खनिज मिश्रण (मिनरल मिक्सचर) का उपयोग करें, ताकि पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे. पशुओं के रहने के स्थान पर पर्याप्त छाया, साफ-सफाई और वेंटिलेशन की व्यवस्था रखने पर भी विशेष जोर दिया गया. साथ ही दोपहर की अत्यधिक गर्मी के दौरान पशुओं को खुले में नहीं छोड़ने और गर्मी से बचाव के सभी उपाय अपनाने की सलाह दी गई.

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बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार की अपील

जागरूकता कार्यक्रम में पशुपालकों को यह भी बताया गया कि यदि किसी पशु में तेज सांस चलना, सुस्ती, भूख कम लगना, बुखार, अत्यधिक लार गिरना या अन्य किसी बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए निकटतम पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सक से संपर्क कर उपचार कराएं. विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने और पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने की अपील भी की गई.

वैज्ञानिक प्रबंधन पर दिया जोर

जिला गव्य विकास पदाधिकारी ने कहा कि पशुधन ग्रामीण किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है. जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिक प्रबंधन, समय पर देखभाल और जागरूकता के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादकता को सुरक्षित रखा जा सकता है.

पदाधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर जिला गव्य विकास कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और पशुपालकों को एल नीनो के संभावित प्रभावों से बचाव संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की.

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