Ranchi: राजधानी रांची में इन दिनों मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. बारिश की शुरुआत के साथ ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी गहराने लगा है. लेकिन मच्छरों से राहत दिलाने का दावा करने वाला रांची नगर निगम अब सवालों के घेरे में है. निगम हर वार्ड में सप्ताह में एक दिन फॉगिंग कराने का दावा करता है और रोस्टर जारी करने की बात भी करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है. नगर निगम की व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल उसकी पारदर्शिता को लेकर उठ रहा है.

निगम की वेबसाइट पर फॉगिंग का अंतिम रोस्टर मार्च 2026 में अपलोड किया गया था. इसके बाद अप्रैल, मई और अब जून का महीना शुरू होने के बावजूद नया रोस्टर सार्वजनिक नहीं किया गया है. ऐसे में नागरिक यह जानने में असमर्थ हैं कि उनके वार्ड में फॉगिंग कब होगी या होगी भी या नहीं.
नगर निगम के दस्तावेजों के अनुसार शहर में फॉगिंग के लिए आठ वाहन और अलग-अलग टीमें मौजूद है. लेकिन यदि वास्तव में ये वाहन नियमित रूप से फील्ड में काम कर रहे हैं, तो फिर शहर के मोहल्लों और कॉलोनियों में इनकी मौजूदगी क्यों नहीं दिख रही? कई वार्डों के लोगों का कहना है कि महीनों से उनके इलाके में फॉगिंग नहीं हुई है.
जानिए ने क्या आरोप लगाए
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फॉगिंग वाहन कभी-कभार वीआईपी इलाकों, बड़े सरकारी परिसरों और मुख्य मार्गों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इनकी पहुंच कम ही दिखाई देती है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. रांची में हर साल डेंगू और मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन अलर्ट और जागरूकता अभियानों का दावा करता है. लेकिन फॉगिंग जैसी बुनियादी व्यवस्था पर उठते सवालों ने निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर बहस खड़ी कर दी है.
