जंगल, कचरा और कारोबार… झारखंड में शुरू हुई ‘ग्रीन बिजनेस’ की नई तैयारी

Ranchi: झारखंड अब सिर्फ खनिज और भारी उद्योगों के लिए नहीं, बल्कि हरित उद्यम और स्थानीय संसाधनों पर आधारित कारोबार के नए...

Ranchi: झारखंड अब सिर्फ खनिज और भारी उद्योगों के लिए नहीं, बल्कि हरित उद्यम और स्थानीय संसाधनों पर आधारित कारोबार के नए मॉडल के लिए भी पहचान बनाने की तैयारी में है. इसी दिशा में जमशेदपुर स्थित एक्सएलआरआई जेवियर श्रम संबंध संस्थान और झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम के बीच अहम साझेदारी हुई है. इस पहल का मकसद जंगल, कृषि और कचरे से जुड़े संसाधनों को रोजगार और नए उद्योगों में बदलना है.

गांव और जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

जमशेदपुर में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबाकर सिद्दीकी ने कहा कि राज्य में गैर-काष्ठ वन उत्पाद, कृषि प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि अब जरूरत इन संसाधनों को बाजार, तकनीक और उद्यमिता से जोड़ने की है ताकि गांव और जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सके.

छह महीने तक होगा विस्तृत अध्ययन

इस साझेदारी के तहत अगले छह महीनों तक विस्तृत अध्ययन किया जाएगा. इसमें खास तौर पर दो क्षेत्रों पर फोकस रहेगा. पहला, पुनर्चक्रण अर्थव्यवस्था यानी ऐसे उद्योग जो कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदल सकें. दूसरा, गैर-काष्ठ वन उत्पाद आधारित कारोबार, जिसमें महुआ, तसर, साल बीज, औषधीय पौधे और पारंपरिक वन उत्पादों से जुड़े उद्यमों की संभावनाएं तलाश की जाएंगी.

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युवाओं को मिलेगा स्टार्टअप और इनक्यूबेशन सपोर्ट

कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योग विभाग के सचिव अरावा राजकमल ने की. उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को सिर्फ नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. उनके अनुसार एक्सएलआरआई की विशेषज्ञता से राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी. समझौते के तहत एक्सएलआरआई, झारखंड औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम के इनक्यूबेशन नेटवर्क को ज्ञान सहयोगी के रूप में सहयोग देगा. इसके जरिए नए उद्यमियों को प्रशिक्षण, बिजनेस मार्गदर्शन, निवेशकों से संपर्क और संस्थागत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. अध्ययन पूरा होने के बाद राज्यभर से 100 संभावित उद्यमों की पहचान कर उन्हें इनक्यूबेशन सहायता भी दी जाएगी.

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