G-7 Summit: पीएम नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के एवियन शहर पहुंच चुके हैं. वहां पहुंचते ही उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी और कहा कि वे दुनिया के बड़े नेताओं के साथ वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करने के लिए बेहद उत्सुक हैं. पीएम मोदी ने साफ किया कि भारत पूरी दुनिया को अधिक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ बनाने के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इस दौरे पर वे कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ खास बैठकें भी करेंगे.
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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ट्रंप समेत कई नेताओं का किया स्वागत
जी7 देशों की बैठक शुरू होने से पहले कई दिलचस्प तस्वीरें सामने आई हैं. इन तस्वीरों में मेजबान देश के राष्ट्रपति मैक्रों यूक्रेन के समकक्ष वोलोदिमीर जेलेंस्की, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई अन्य नेताओं का स्वागत करते दिखे. तस्वीरों में इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी को भी देखा गया.

क्या है G-7 शिखर सम्मेलन?
जी7 के गठन की कहानी भी काफी दिलचस्प है. दरअसल, 1970 का दौर, वह समय था, जब पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था तेल के बढ़ते दामों की वजह से मुश्किल में थी. खासकर तेल पैदा करने वाले देशों के संगठन- ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) यानी पेट्रोल निर्यातक देशों के संगठन की मनमानी की वजह से. ओपेक की तरफ से तेल के निर्यात पर लगी पाबंदियों का असर ऐसा हुआ कि तब अमेरिका के वित्त मंत्री जॉर्ज शुल्ज ने एक बैठक बुला ली. पहली बैठक में छह देश इकट्ठा हुए और आर्थिक संकटों से निपटने पर चर्चा की. फैसला हुआ कि एक साल बाद यह देश फिर मिलेंगे और उठाए गए कदमों की समीक्षा करेंगे. एक साल बाद जब यह बैठक फिर हुई तो कनाडा को भी इसका हिस्सा बना लिया गया. इस तरह जी7 अस्तित्व में आया. यूरोपीय आयोग (ईसी) के अध्यक्ष को भी जी7 की बैठकों के लिए आमंत्रित कर दिया गया. सामूहिक तौर पर यूरोप जी7 का हिस्सा नहीं बना. साल 1997 में रूस को इस समूह में शामिल किया गया था. इसके बाद यह जी-8 बन गया. हालांकि, 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया और यह वापस जी-7 बन गया.

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