हजारीबाग: CCL हॉस्पिटल में 6.50 लाख के मेडिकल बिल घोटाले का आरोप, दो डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर

Hazaribagh : चरही स्थित CCL हॉस्पिटल में मेडिकल बिलों के भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. आरोप है...

CCL हॉस्पिटल

Hazaribagh : चरही स्थित CCL हॉस्पिटल में मेडिकल बिलों के भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. आरोप है कि करीब 6.50 लाख रुपये के मेडिकल बिल दो चिकित्सकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर पास कर दिए गए. मामला सामने आने के बाद CCL प्रबंधन में हड़कंप मच गया है और हस्ताक्षरों की हैंडराइटिंग जांच कराने की सिफारिश की गई है. जानकारी के अनुसार, जिन दो चिकित्सकों के हस्ताक्षर बिलों पर दर्शाए गए हैं, उन्होंने लिखित रूप से प्रबंधन को बताया है कि संबंधित हस्ताक्षर उनके नहीं हैं. दोनों चिकित्सकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

19 जून 2024 से 24 मार्च 2026 के बिलों पर सवाल

बताया जा रहा है कि 19 जून 2024 से 24 मार्च 2026 के बीच पारित कई मेडिकल बिलों पर दोनों डॉक्टरों के हस्ताक्षर अंकित हैं. आरोप है कि अस्पताल की कार्यरत डॉक्टर डॉ. कुमारी श्वेता ने अपने मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर करवाए. हालांकि इस पूरे मामले की जांच जारी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए एरिया फाइनेंस विभाग ने भी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों में गड़बड़ी की आशंका जताई है. विभागीय पत्राचार में हस्ताक्षरों की हैंडराइटिंग/फॉरेंसिक जांच कराने की आवश्यकता बताई गई है. सूत्रों के अनुसार, जांच केवल हस्ताक्षरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दवा खरीद, बिल पारित करने और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा होगी.

कई अधिकारियों तक पहुंचा मामला

सूत्रों के मुताबिक, पूरे प्रकरण की जानकारी CCL के CMD, मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO), निदेशक (तकनीकी), निदेशक (वित्त) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है. विभागीय स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. एक चिकित्सक ने लिखित रूप से विभाग को सूचित किया है कि बिलों पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और निष्पक्ष जांच कराई जाए. दूसरे चिकित्सक ने भी कहा कि मामला जांच के अधीन है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित होगा. इस संबंध में डॉ. कुमारी श्वेता ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है. उन्होंने इसे कंपनी का आंतरिक विषय बताते हुए सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार किया. यदि जांच में फर्जी हस्ताक्षर, वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है.

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