Hazaribagh : नगर निगम प्रशासन की कथित संवेदनहीनता और लापरवाही के खिलाफ हजारीबाग के समस्त सफाई कर्मचारियों, वार्ड जमादारों और कर्मचारी संघ का गुस्सा आज सातवें आसमान पर पहुंच गया. भीषण और जानलेवा गर्मी के बीच दोहरे काम के दबाव के कारण गंभीर रूप से बीमार हुए वार्ड जमादार श्री दीपक कुमार के समर्थन में आज सैकड़ों कर्मचारियों ने नगर निगम कार्यालय के समक्ष सामूहिक आक्रोश व्यक्त करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया. कर्मचारियों ने नगर आयुक्त को एक बेहद तीखा और अंतिम चेतावनी मांग-पत्र सौंपते हुए साफ कर दिया है कि अगर आज ही ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं हुआ, तो पूरे शहर की सफाई व्यवस्था ठप कर दी जाएगी.
कर्मचारी संघ ने प्रशासन पर लगाया गंभीर आरोप
कर्मचारी संघ ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पीड़ित वार्ड जमादार श्री दीपक कुमार पर न केवल अपने विस्तृत वार्ड में घूमकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने का भारी दबाव था, बल्कि इस भीषण गर्मी में उन्हें बीएलओ का भी अतिरिक्त कार्य सौंप दिया गया था. व्यावहारिक तौर पर एक वार्ड का क्षेत्रफल इतना बड़ा होता है कि फील्ड स्टाफ सुबह से दोपहर तक उसी में पूरी तरह थक जाता है. ऐसे में जानलेवा धूप के बीच इस दोहरे कार्य का बोझ डालना सीधे तौर पर कर्मचारी के स्वास्थ्य पर प्रशासनिक हमला था. इसी हठधर्मिता के कारण दोपहर की भीषण धूप में ड्यूटी करते समय दीपक कुमार को लू लगी और उनका ब्रेन हैमरेज हो गया. वर्तमान में वे रांची के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं, जहां रोजाना का इलाज खर्च करीब नब्बे हजार रुपये आ रहा है जिसे वहन करना उनके गरीब परिवार के लिए असंभव है.

दीपक कुमार हादसे पर फूटा कर्मचारियों का गुस्सा
आक्रोशित कर्मचारियों ने प्रशासन को घेरते हुए सबसे बड़ा साक्ष्य सामने रखा है. यूनियन ने बताया कि वर्तमान जानलेवा मौसम को देखते हुए घटना से ठीक दस दिन पहले ही नगर आयुक्त को लिखित आवेदन देकर समय-सारणी बदलने की गुहार लगाई गई थी, जिसे प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया. लेकिन जैसे ही दीपक कुमार के साथ यह भयानक हादसा घटा, प्रशासन ने अपनी गर्दन फंसती देख आनन-फानन में उसके अगले ही दिन समय-सारणी में बदलाव का नया आदेश जारी कर दिया. कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन का यह कदम खुद साबित करता है कि पुरानी समय-सारणी गलत और जानलेवा थी. प्रशासन ने एक कर्मचारी की जान संकट में पड़ने का इंतजार किया, जो सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है.
इलाज का खर्च और दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग
कर्मचारी संघ ने वार्ता के बजाय सीधे लिखित और ठोस आदेश की मांग करते हुए कई मुख्य बातें सामने रखी हैं. उनकी पहली मांग है कि श्री दीपक कुमार के इलाज में हो रहे प्रतिदिन के नब्बे हजार रुपये सहित आगे का समस्त मेडिकल खर्च नगर निगम प्रशासन आज ही सीधे अस्पताल को भेजने का लिखित आदेश जारी करे. इसके साथ ही वार्ड जमादारों के विस्तृत कार्यक्षेत्र को देखते हुए भविष्य में किसी भी फील्ड या सफाई स्टाफ से बीएलओ का अतिरिक्त कार्य न कराया जाए. कर्मचारियों की यह भी मांग है कि यूनियन के दस दिन पुराने आवेदन को दबाकर रखने वाले और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को चिह्नित कर उन पर तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए.
नगर निगम कर्मचारियों की दो टूक चेतावनी
समस्त सफाई कर्मचारियों और संघ सदस्यों ने दो टूक शब्दों में अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इन न्यायसंगत मांगों पर आज ही तुरंत संज्ञान लेते हुए ठोस लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता है, तो नगर निगम के सभी सफाई कर्मचारी और जमादार सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन कार्य-बहिष्कार पर चले जाएंगे. इस पूर्ण तालाबंदी और उग्र आंदोलन से उत्पन्न होने वाली शहर की विकट स्थिति की संपूर्ण जवाबदेही सीधे नगर निगम प्रशासन की होगी. इसके साथ ही, कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे घटना के अगले ही दिन समय-सारणी बदलने के प्रशासनिक सबूत के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध स्थानीय थाने में सीधे प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए भी पूरी तरह बाध्य होंगे.
