Hazaribagh: सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता के दावों की हकीकत बरही प्रखंड में सामने आ गई है. महुगढ़ा से रानीचुवां तुरी टोला तक जाने वाली सड़क और बड़ा नदी पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी पुलिया पहली ही बारिश की परीक्षा में फेल हो गई. पुलिया के दोनों ओर हाल ही में बने लगभग 100 मीटर लंबे कालीकरण सड़क में जगह-जगह चौड़ी दरारें पड़ गई हैं. सड़क की यह स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ-साथ सरकारी धन के उपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
पहली बारिश ने खोल दी करोड़ों के निर्माण की पोल
ग्रामीणों के अनुसार सड़क और पुलिया का निर्माण महज चार-पांच महीने पहले ही पूरा हुआ था. लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों तक आवागमन की समस्या दूर होगी, लेकिन मानसून की पहली ही बारिश में सड़क का फट जाना यह बताने के लिए काफी है कि निर्माण में किस स्तर की लापरवाही बरती गई.
एक हजार से अधिक ग्रामीणों पर मंडराया आवागमन का संकट
सड़क क्षतिग्रस्त होने से रानीचुवां, महुगढ़ा और आसपास के करीब एक हजार की आबादी के लिए आवागमन मुश्किल होने की आशंका है. यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो लगातार बारिश में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
सूचना बोर्ड तक नहीं, पारदर्शिता पर भी सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर कार्य योजना, लागत, एजेंसी और अवधि से संबंधित कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया. इससे पूरे निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि जब सूचना ही सार्वजनिक नहीं होगी तो जवाबदेही कैसे तय होगी.
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ग्रामीणों ने लगाया घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार का आरोप
मुखिया प्रतिनिधि रामचंद्र टुडु, मनोज कुमार महतो, लक्ष्मण तुरी, अनिल सुरेन और अजय तुरी ने कहा कि सड़क की हालत साफ संकेत दे रही है कि निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं हुआ और निर्माण कार्य में संभावित भ्रष्टाचार के कारण पहली ही बारिश में सड़क दरक गई.
ठेकेदार पर कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों के अनुसार पुलिया और सड़क का निर्माण ठेकेदार बीरेंद्र यादव द्वारा कराया गया था. अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच, दोषी ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई तथा क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है.
जनता का सवाल-क्या सरकारी पैसे से बनने वाली सड़कें सिर्फ पहली बारिश तक ही टिकेंगी?
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क पहली ही बारिश में टूटने लगे तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सरकारी निर्माण व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है. अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह दोष तय कर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य निर्माण घोटालों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा.
