Hazaribagh: भारतीय जनता पार्टी के जिला संगठन में चल रहा असंतोष अब सार्वजनिक विद्रोह का रूप लेने लगा है. ताजा मामला भाजपा महिला मोर्चा की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व जिला उपाध्यक्ष ज्योत्सना देवी से जुड़ा है. उन्होंने संगठन द्वारा सौंपी गई नई जिम्मेदारी (मंडल उपाध्यक्ष) को अपना अपमान बताते हुए इसे स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है. ज्योत्सना देवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जिला नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सीधे तौर पर सवाल दागे हैं.
’15 साल की सेवा का क्या यही सिला है?’
ज्योत्सना देवी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, कि वे दो बार महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष और एक बार विधायक प्रतिनिधि जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर पार्टी की सेवा कर चुकी हैं. इसके बावजूद उन्हें मंडल स्तर की जिम्मेदारी देना उनके 15 वर्षों के योगदान और समर्पण का अनादर है. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “मुझे ऐसा सम्मान स्वीकार नहीं है, पार्टी अपना पद अपने पास रखे.”
उपेक्षित महसूस कर रहे हैं पुराने कार्यकर्ता
इस इस्तीफे ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नए चेहरों को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है. कार्यकर्ताओं में यह चर्चा आम है, कि जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले नेताओं की जगह अब ‘पैराशूट’ नेताओं या चहेतों को तवज्जो मिल रही है, जिससे जिला अध्यक्ष के खिलाफ असंतोष की लहर तेज हो गई है.
इन सवालों के घेरे में जिला नेतृत्व
- क्या वरिष्ठ पदों पर रहे नेताओं को निचले पदों पर धकेलना रणनीति है या व्यक्तिगत खुन्नस?
- क्या चुनावी साल से पहले पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी पार्टी की एकता को प्रभावित करेगी?
- क्या जिला अध्यक्ष इन शिकायतों का समाधान करेंगे या विरोध के स्वर और मुखर होंगे?
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर भाजपा जिला नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन ज्योत्सना देवी के इस खुले बहिष्कार ने यह साफ कर दिया है, कि हजारीबाग भाजपा के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.
फेसबुक पोस्ट से मचा हड़कंप
ज्योत्सना देवी ने पोस्ट में सीधे सवाल किया कि “क्या उन्होंने कभी पार्टी की मीटिंगों या कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया या चुनावों में मेहनत नहीं की?” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता रही हैं, लेकिन पदों के इस तरह के वितरण ने उनकी निष्ठा पर चोट की है.
