Hazaribagh : हजारीबाग अब सिर्फ कोयला या ऐतिहासिक धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी बेटियों की बदौलत देश भर में स्वच्छता की नई मिसाल के रूप में पहचाना जाएगा. भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ 2025-26 के राष्ट्रीय नतीजों ने पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया है. शहर के हृदय स्थल में स्थित ‘बिहारी बालिका उच्च विद्यालय’ ने राष्ट्रीय स्तर पर कड़े मुकाबले के बीच 21वां रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है. सिर्फ इतना ही नहीं, राज्य स्तर पर भी इस स्कूल ने झारखंड के तमाम बड़े और नामी विद्यालयों को पछाड़ते हुए दूसरा स्थान अपने नाम किया है. 93.30 के शानदार स्कोर के साथ इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर जैसे ही आई, स्कूल परिसर में जश्न का माहौल बन गया. छात्राओं और शिक्षकों की आंखों में गर्व के आंसू थे और हर कोई इस सामूहिक जीत की बधाई एक-दूसरे को दे रहा था.
तीन चक्र के कड़े चक्रव्यूह को पार कर चूम ली सफलता
केंद्र सरकार की यह प्रतिष्ठित रेटिंग हासिल करना आसान नहीं था. इसके लिए स्कूल को एक कड़ी और पारदर्शी चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. सबसे पहले विद्यालय ने डिजिटल पोर्टल पर अपने संसाधनों, व्यवस्थाओं और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी, आंकड़े और तस्वीरें अपलोड कीं, इसके बाद जिला स्तर की टीम ने जांच की, फिर राज्य स्तर पर मानकों का मूल्यांकन हुआ. अंत में दिल्ली से आई केंद्रीय विशेषज्ञ टीम ने बिना पूर्व सूचना के स्कूल का भौतिक निरीक्षण किया और जमीनी स्थिति को परखा, सभी चरणों में मिले अंकों के आधार पर देश के 200 सर्वश्रेष्ठ स्कूलों की सूची तैयार की गई, जिन्होंने पर्यावरण और स्वच्छता को अपनाया है. इस उपलब्धि पर विद्यालय को केंद्र सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और राष्ट्रीय मान्यता प्रमाण पत्र दिया जाएगा.
जब एक साथ मिले शुद्ध पानी, हरियाली और ‘औषधि वाटिका’ के नंबर
स्कूल प्रशासन के मुताबिक, केंद्रीय टीम का मुख्य फोकस इस बात पर था कि स्कूल सिर्फ कागजों पर साफ है या बच्चों के व्यवहार में भी स्वच्छता दिखती है. स्कूल की प्राचार्य ने साझा किया कि पिछले कई महीनों से पूरा स्टाफ और छात्राएं कुछ बुनियादी मानकों को दुरुस्त करने में जुटे थे. इनमें छात्राओं के लिए शुद्ध पेयजल की उपलब्धता, आधुनिक व हाइजीनिक शौचालय, हाथ धोने के लिए साबुन की नियमित व्यवस्था, वर्षा जल संचयन और बिजली की बचत के लिए किए गए प्रयास शामिल थे. इस पूरी कहानी में सबसे खूबसूरत मोड़ तब आया, जब स्कूल परिसर में तैयार की गई ‘औषधि वाटिका’ को केंद्रीय टीम ने देखा. यहां छात्राएं खुद गमलों और क्यारियों में औषधीय व फलदार पौधों की बागवानी करती हैं, जिसने फाइनल स्कोर बढ़ाने में संजीवनी का काम किया.
सरकारी सिस्टम में बदलाव की नई इबारत बनीं यहां की छात्राएं
इस सफलता की सबसे बड़ी रीढ़ यहां पढ़ने वाली बेटियां हैं. छात्राओं का कहना है कि शुरुआत में यह सिर्फ एक सरकारी अभियान जैसा था, लेकिन धीरे-धीरे यह हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गया. अब स्कूल की कोई भी छात्रा न तो परिसर में गंदगी फैलाती है और न ही पानी या बिजली की बर्बादी होने देती है. इस रेटिंग का मूल उद्देश्य भी यही है कि देश के भावी नागरिकों में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छता के प्रति एक व्यावहारिक समझ पैदा की जाए. हजारीबाग के इस सरकारी स्कूल ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो और नीयत साफ, तो संसाधनों की कमी कभी भी राष्ट्रीय स्तर पर चमकने से नहीं रोक सकती.
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