Hazaribagh: जिले के टाटीझरिया का नाम सुनते ही लोगों के मन में यहां की प्रसिद्ध मिठाई ‘गुलाब जामुन’ का ख्याल तो जरूर ओता होगा. लेकिन इन दिनों यह इलाका सिर्फ मिठाई वाले गुलाब जामुन के लिए ही नहीं, बल्कि जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगे असली ‘जामुन’ की बहार के लिए भी चर्चा में है. प्रखंड और इसके आसपास के जंगलों में जामुन के पेड़ फलों से लदे हुए हैं. काले, चमकदार और रसीले जामुनों से झुकी डालियां राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं. प्रकृति के इस अनमोल उपहार का स्वाद लेने के लिए युवा, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं.
जंगलों में महक उठा जामुन का मौसम
भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को हालिया बारिश ने बड़ी राहत दी है. मौसम के बदलते मिजाज के साथ जंगलों में हरियाली लौट आई है और जामुन के पेड़ों पर फल पूरी तरह पककर तैयार हो गए हैं. सुबह और शाम के समय युवाओं की टोलियां जंगलों में पहुंच रही हैं. कोई पेड़ों पर चढ़कर तो कोई जमीन पर गिरे ताजे फलों को चुन रहा है. जंगलों में ये चहल-पहल किसी मेले से कम नहीं दिख रही.

जंगलों से लाए गए ताजे जामुन अब स्थानीय हाट-बाजारों की रौनक बढ़ा रहे हैं. टाटीझरिया, चौपारण और आसपास के क्षेत्रों के बाजारों में जामुन की अच्छी आवक हो रही है. लोग बड़े उत्साह के साथ इसकी खरीदारी कर रहे हैं. स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों के लिए यह मौसम अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है. कई परिवारों के लिए यह मौसमी फल रोजगार का एक सशक्त माध्यम साबित हो रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सालभर इंतजार के बाद आने वाला यह फल कुछ ही दिनों के लिए उपलब्ध रहता है, इसलिए लोग इसका भरपूर आनंद लेना चाहते हैं.
सेहत का खजाना है जामुन
स्वाद के साथ-साथ जामुन स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जामुन में विटामिन-सी, आयरन, कैल्शियम (Vitamin C, iron, calcium) और भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) पाए जाते हैं. इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसके बीजों का चूर्ण ब्लड शुगर को काबू करने में भी उपयोगी माना जाता है. इसके अलावा यह रक्त को शुद्ध करने और त्वचा में निखार लाने में भी सहायक होता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में उपलब्ध प्राकृतिक और बिना रासायनिक प्रक्रिया वाले फल शरीर के लिए अधिक लाभकारी होते हैं. “गुलाब जामुन” की मिठास के लिए मशहूर टाटीझरिया में इन दिनों जंगलों के जामुन भी लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं. स्वाद, सेहत और रोजगार का यह अनोखा संगम क्षेत्र की पहचान को नई मिठास दे रहा है.


