Hazaribagh: कटकमसांडी प्रखंड का 500 बेड वाला विशाल सरकारी अस्पताल इन दिनों बदहाली, लापरवाही और अव्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है. करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल में जहां आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक जांच मशीनों का दावा किया जाता है, वहीं धरातल पर मरीजों को न डॉक्टर मिल रहे हैं और न ही समुचित इलाज. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अस्पताल अब भूत बंगला बनकर रह गया है.
अस्पताल के कमरों में लटका रहता ताला
बीती रात सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को जब परिजन इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे तो उन्हें अस्पताल के अधिकांश कमरों में ताले लटके मिले. परिजन डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की तलाश में इधर उधर भटकते रहे, लेकिन घंटों तक कोई जिम्मेदार चिकित्सक मौजूद नहीं मिला. इस दौरान घायल मरीज दर्द से तड़पता रहा और परिजनों में आक्रोश एवं बेबसी साफ दिखाई दी.

सरकारी दवाएं मरीजों की पहुंच से बाहर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में हर महीने करोड़ों रुपये की सरकारी दवाइयां आती हैं, लेकिन मरीजों तक उनका लाभ नहीं पहुंच पाता. दवा के नाम पर केवल कुछ सामान्य टैबलेट देकर मरीजों को वापस भेज दिया जाता है.लोगों का कहना है कि चाहे बुखार हो, दर्द हो या अन्य गंभीर बीमारी सभी को लगभग एक जैसी दवाइयां थमा दी जाती हैं.
करोड़ो की जांच मशीनें बनी शो पीस
अस्पताल में करोड़ों की लागत से लगी अत्याधुनिक जांच मशीनें भी शोपीस बनकर रह गई हैं. मशीनें मौजूद होने के बावजूद मरीजों को बाहर निजी जांच केंद्रों में महंगे टेस्ट कराने पड़ रहे हैं. इससे गरीब और जरूरतमंद मरीज आर्थिक बोझ झेलने को मजबूर हैं. क्षेत्रीय लोगों ने अस्पताल प्रभारी डॉ. भूषण राणा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद न तो जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दे रहे हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बयान अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन कटकमसांडी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है. लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल की दवाओं, मशीनों और बजट की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितता और घोटाले का खुलासा हो सकता है. क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कारवाई की मांग की.
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