Hazaribagh: पदमा प्रखंड शुक्रवार को उस समय गम और आक्रोश का केंद्र बन गया, जब एक ही परिवार से तीसरी बार जवान बेटे की अर्थी उठी. 28 वर्षीय शशि कुमार (पिता–स्व. देवकुमार राम) ने रांची में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. बीते दो वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं ने इसी परिवार के तीन युवकों की जान ले ली, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई.
अशोक गेट के पास हुआ था दर्दनाक हादसा
30 जून की शाम करीब 6 बजे शशि कुमार अपने मित्रों के साथ पदमा के अशोक गेट के समीप सड़क किनारे खड़े थे. इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार से आ रही मोटरसाइकिल (संख्या–JH02BD1737) ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी. हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल हजारीबाग के आरोग्यम अस्पताल ले जाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रांची रेफर किया गया, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद गुरुवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली.

परिवार का छिन गया इकलौता सहारा
शशि कुमार मजदूरी कर अपनी वृद्ध मां और दो विधवा बहनों का भरण-पोषण करते थे. परिवार की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी. उनके निधन के बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट गहरा गया है. घर में मातम पसरा है और भविष्य को लेकर परिजन चिंतित हैं.
दो वर्षों में तीसरी बार उजड़ा परिवार
इस घटना ने पूरे क्षेत्र को इसलिए भी झकझोर दिया क्योंकि पिछले दो वर्षों के दौरान शशि कुमार के दो चचेरे भाइयों की भी अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो चुकी है. लगातार तीसरी बार एक ही आंगन से जवान बेटे की अर्थी उठने से गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है.
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पार्थिव शरीर के साथ थाने पहुंचे ग्रामीण, कार्रवाई की मांग
शुक्रवार को शशि कुमार का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही सैकड़ों ग्रामीण, महिलाएं और परिजन पदमा थाना पहुंच गए. लोगों ने पार्थिव शरीर को थाना परिसर में रखकर दुर्घटना के जिम्मेदार मोटरसाइकिल चालक के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दोषी पर शीघ्र कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए. काफी देर तक थाना परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा. बाद में पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और त्वरित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद लोगों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया.
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था और तेज रफ्तार वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर किया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ नियमित कार्रवाई हो, तो ऐसे हादसों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है.


