हजारीबाग: क्या है ‘खुजली तालाब’ की अनोखी मान्यता? 150 साल से नहीं टूटा लोगों का भरोसा

Hazaribagh: झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी हजारीबाग में आस्था और चमत्कार से जुड़ा एक अनोखा मामला हमेशा चर्चा में रहता है....

Hazaribagh:
हजारीबाग का रहस्यमयी 'खुजली तालाब'

Hazaribagh: झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी हजारीबाग में आस्था और चमत्कार से जुड़ा एक अनोखा मामला हमेशा चर्चा में रहता है. शहर में एक ऐसा ऐतिहासिक तालाब मौजूद है, जिसे स्थानीय लोग वर्षों से ‘खुजली तालाब’ के नाम से पुकारते हैं. मान्यता है कि इस तालाब की पवित्र मिट्टी का शरीर पर लेप लगाने और इसके पानी में डुबकी लगाने से पुराने से पुराने दाद, खाज, खुजली समेत कई तरह के चर्म रोगों से मुक्ति मिल जाती है.

मिशन अस्पताल के समीप स्थित है 150 वर्ष पुराना छेदी तालाब

करीब 150 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक तालाब का वास्तविक नाम ‘छेदी तालाब’ है. यह तालाब शहर के बड़कागांव रोड स्थित मिशन अस्पताल के समीप बाबा कमल साह और बाबा आसन साह के पावन दरबार परिसर में स्थित है. वर्षों पुरानी परंपरा और अटूट आस्था के कारण यहां हर सप्ताह हजारों लोग अपनी त्वचा संबंधी बीमारियों से निजात पाने की आस में पहुंचते हैं.

शरीर पर 15 मिनट मिट्टी का लेप लगाने का है नियम

स्थानीय निवासी मोहम्मद रिजवान के अनुसार, चर्म रोग से पीड़ित लोग सबसे पहले तालाब के किनारे बैठकर उसकी मिट्टी निकालते हैं और उसे अपने पूरे शरीर पर लेप की तरह लगाते हैं. लगभग 15 मिनट तक मिट्टी को शरीर पर सुखाने के बाद श्रद्धालु तालाब के पानी में स्नान करते हैं. स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि इस अनोखी प्रक्रिया से त्वचा संबंधी गंभीर से गंभीर परेशानियों और खुजली में राहत महसूस होती है.

गुरुवार से शनिवार तक लगती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

इस अनोखी परंपरा और चमत्कारी मान्यता के कारण न केवल हजारीबाग, बल्कि आसपास के दूर-दराज के जिलों से भी लोग यहां पहुंचते हैं. सप्ताह के तीन दिन—गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार—को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है. स्थानीय निवासियों के बीच यह मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है कि इस तालाब की मिट्टी और पानी में कुदरती औषधीय गुण मौजूद हैं.

आस्था के बीच डॉक्टरी सलाह भी है बेहद जरूरी

हालांकि, चर्म रोगों के इस पारंपरिक उपचार को लेकर अब तक कोई वैज्ञानिक या चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आस्था अपनी जगह है, लेकिन किसी भी गंभीर या लंबे समय से चले आ रहे चर्म रोग के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह और उचित जांच कराना बेहद जरूरी है. केवल पारंपरिक मान्यताओं के भरोसे इलाज करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
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