News Wave Desk : 13 जून 2026 भारत में एक ऐसी स्वास्थ्य चुनौती तेजी से उभर रही है, जिसने डॉक्टरों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है. हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, 20 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं में भी इन मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. विशेषज्ञ इसे भारत का “साइलेंट हेल्थ क्राइसिस” बता रहे हैं. कुछ साल पहले तक यह माना जाता था कि हार्ट अटैक 60 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली समस्या है. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें 30 और 40 वर्ष की उम्र के लोग अचानक कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक का शिकार हुए. हाल ही में भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जस्पाल राणा के निधन ने भी इस बहस को फिर से तेज कर दिया कि आखिर युवा भारतीयों के दिल को क्या हो रहा है.
बदलती जीवनशैली बन रही सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली इस संकट की सबसे बड़ी वजह है. आज का युवा पहले की तुलना में अधिक तनाव, कम नींद और अधिक स्क्रीन टाइम वाली जिंदगी जी रहा है. दिनभर ऑफिस की कुर्सी पर बैठना, जंक फूड खाना और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे-धीरे हृदय को कमजोर कर रही है. कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि कई युवा दिन में 10-12 घंटे बैठकर काम करते हैं. इसके बाद भी उनका अधिकांश समय मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन के सामने गुजरता है. परिणामस्वरूप शरीर की कैलोरी खर्च नहीं होती और मोटापा, हाई बीपी तथा डायबिटीज जैसी समस्याएँ जन्म लेने लगती हैं.
फिट दिखना अब स्वास्थ्य की गारंटी नहीं
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई बार हार्ट अटैक का शिकार होने वाले लोग बाहर से पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देते हैं. वे जिम जाते हैं, सामान्य वजन रखते हैं और सक्रिय जीवन जीते हुए नजर आते हैं. लेकिन शरीर के अंदर हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर या धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं चुपचाप बढ़ती रहती हैं. डॉक्टरों के अनुसार केवल फिट दिखना पर्याप्त नहीं है. नियमित स्वास्थ्य जांच ही यह बता सकती है कि हृदय वास्तव में कितना स्वस्थ है. कई मामलों में पहला हार्ट अटैक ही अंतिम साबित हो रहा है क्योंकि लोगों को पहले किसी गंभीर समस्या का एहसास ही नहीं होता.
हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचना है तो इन 4 चीजों पर रखें नजर
हार्ट अटैक और स्ट्रोक अक्सर अचानक होने वाली बीमारी मानी जाती है, लेकिन एक बड़े अध्ययन में पता चला है कि ज्यादातर मामलों में इसके संकेत कई साल पहले ही दिखाई देने लगते हैं. शोध में पाया गया कि करीब 99% हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर के मामलों के पीछे चार प्रमुख कारण जिम्मेदार होते हैं. इन चार कारणों में हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड शुगर (डायबिटीज) और तंबाकू का सेवन शामिल हैं. अध्ययन के अनुसार अधिकांश लोगों में ये समस्याएं पहले से मौजूद थीं, लेकिन समय पर जांच और इलाज नहीं होने के कारण बाद में गंभीर हृदय रोग का खतरा बढ़ गया. विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित खानपान, व्यायाम और तंबाकू से दूरी बनाकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यानी समय रहते सावधानी बरती जाए तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है.
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तनाव और नींद की कमी का सीधा असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आज का युवा मानसिक दबाव में जी रहा है. नौकरी का तनाव, आर्थिक चुनौतियां, सोशल मीडिया का दबाव और भविष्य की चिंता लगातार मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है. यह तनाव शरीर में हार्मोनल बदलाव पैदा करता है जो हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है. इसके साथ ही नींद की कमी भी बड़ी समस्या बन चुकी है. देर रात तक मोबाइल चलाना, ओटीटी प्लेटफॉर्म देखना और अनियमित दिनचर्या हृदय स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार कम नींद लेने वालों में हाई बीपी और हृदय रोग का जोखिम काफी बढ़ जाता है.
युवाओं में बढ़ रहा स्ट्रोक का खतरा
केवल हार्ट अटैक ही नहीं, बल्कि स्ट्रोक के मामलों में भी युवाओं की संख्या बढ़ रही है. रिपोर्टों के अनुसार भारत में हर वर्ष 18 से 20 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं. इनमें 10 से 15 प्रतिशत मरीज 45 वर्ष से कम उम्र के होते हैं. कई बड़े शहरों के अस्पतालों में तो 50 वर्ष से कम आयु के मरीजों की संख्या 20 से 25 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. विशेषज्ञ इसके लिए तंबाकू सेवन, शराब, प्रदूषण और अस्वस्थ जीवनशैली को जिम्मेदार मानते हैं. हृदय रोगों के साथ-साथ एक और चिंता सामने आई है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है. कोलोरेक्टल, स्तन, पेट और अग्नाशय के कैंसर अब पहले की तुलना में कम उम्र में सामने आ रहे हैं. इसके पीछे भी मोटापा, खराब खानपान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारण बताए जा रहे हैं.
भारतीयों में जोखिम अधिक क्यों?
विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशियाई लोगों में आनुवंशिक रूप से हृदय रोगों का जोखिम अधिक पाया जाता है. यही कारण है कि भारतीयों में पश्चिमी देशों की तुलना में हृदय रोग अक्सर लगभग एक दशक पहले दिखाई देते हैं. जब आनुवंशिक जोखिम के साथ खराब जीवनशैली जुड़ जाती है तो खतरा और बढ़ जाता है.

इन संकेतों को कभी न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि कुछ लक्षण दिल की बीमारी का संकेत हो सकते हैं. अगर आपको सीने में दर्द या दबाव महसूस हो, सांस लेने में परेशानी हो, बिना वजह ज्यादा थकान लगे, दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो जाए, चक्कर आए या हाथ, कंधे और जबड़े में दर्द हो, तो इसे हल्के में न लें. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल की बीमारियों से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है. रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें और सप्ताह में 150 मिनट शारीरिक गतिविधि जरूर करें. पर्याप्त नींद लें और हर दिन 7 से 8 घंटे सोएं. धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें. तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान का सहारा लें. साथ ही, साल में एक बार ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर करवाएं. जंक फूड की बजाय पौष्टिक और संतुलित भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.
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