Jamtara: झारखंड राज्य रसोईया संयोजिका यूनियन जिला कमेटी जामताड़ा के बैनर तले शुक्रवार को जिले की रसोईया-संयोजिकाओं ने अपनी 8 सूत्री मांगों को लेकर जिला समाहरणालय के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया. धरना सभा की अध्यक्षता मुकिमा बीबी ने की, जबकि संचालन कार्यकारी अध्यक्ष मोहन मंडल ने किया.
रसोईया-संयोजिकाओं को मिल रहा कम मानदेय
धरना को संबोधित करते हुए सीटू नेता चंडी दास पुरी ने कहा, कि रसोईयों के बिना मध्याह्न भोजन योजना का संचालन संभव नहीं है. रसोईया-संयोजिकाओं को प्रतिदिन चार से पांच घंटे तक काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें मात्र ₹2000 मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो बेहद कम है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मानदेय बढ़ाकर ₹3000 करने की घोषणा की थी, लेकिन कुछ महीनों तक भुगतान के बाद फिर पुरानी दर से ही भुगतान किया जाने लगा, वह भी अनियमित रूप से.

रसोईया-संयोजिकाओं की ये हैं प्रमुख मांगें
सीटू नेता चंडी दास ने कहा कि रसोईया-संयोजिकाओं की प्रमुख मांगों में प्रतिवर्ष 18 दिन का आकस्मिक अवकाश, 6 माह का प्रसूति अवकाश, सुरक्षा किट की व्यवस्था, दुर्घटना बीमा के रूप में ₹5 लाख की सहायता, स्थायीकरण होने तक ₹26 हजार मासिक मानदेय, नियमावली का गठन तथा संयोजिकाओं के लिए मानदेय की व्यवस्था शामिल है. साथ ही केंद्र सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की भी मांग की गई.
मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन की चेतावनी
वहीं, राज्य नेता लखनलाल मंडल ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ प्रशासन की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि सबसे कम मानदेय पाने वाली रसोईया-संयोजिकाओं के साथ छल किया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों की अनदेखी करती रही तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा.
कार्यकारी अध्यक्ष मोहन मंडल ने कहा कि आने वाले दिनों में जिलेभर की रसोईया-संयोजिकाओं को संगठित होकर आंदोलन को और मजबूत करना होगा. कार्यक्रम के अंत में प्रवीण शरण ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए धरना का समापन किया.
ये रहीं मौजूद
धरना कार्यक्रम में मैना सिंह, नुनी बाला देवी, पुतुल देवी, सीमा बावरी, अंजली सिंह, मंगला सिंह, मालती देवी, आशा देवी, दुल्हन हेमराम, मंजू देवी, भवानी मरांडी, प्रमिला देवी, नूरजहां खातून, ललिता सोरेन, लक्ष्मी दास समेत बड़ी संख्या में रसोईया-संयोजिकाएं मौजूद थीं.
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