योगेश कुमार

Jamtara: जिले के नारायणपुर प्रखंड के चेरकपानी गांव के प्रधान टोला में हर घर नल-जल योजना की धीमी प्रगति का असर अब साफ दिखने लगा है. शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी डोभा और चुआं का दूषित पानी पीने को मजबूर है. जानकारी के अनुसार, नारायणपुर प्रखंड के 25 पंचायतों के 262 गांवों में करीब 25 हजार परिवारों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए 263 करोड़ रुपये की हर घर नल-जल योजना शुरू की गई थी. वर्ष 2023 में शुरू हुई इस योजना को पहले 2024-25 तक पूरा करना था, लेकिन अब इसकी समय-सीमा बढ़ाकर मार्च 2028 कर दी गई है.
खराब चापाकलों ने बढ़ाई समस्या
चेरकपानी गांव के प्रधान टोला में करीब 150 की आबादी है. यहां लगाए गए चार चापाकलों में तीन खराब पड़े हैं, जबकि एक चापाकल नदी के पास है जिससे सीमित मात्रा में ही पानी मिल पा रहा है. ऐसे में ग्रामीणों को खेतों और तालाब किनारे बने डोभा-चुआं से पानी लाकर उपयोग करना पड़ रहा है.
ग्रामीणों में बीमारी का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के उपयोग से बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. महिलाओं को रोजाना दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है और उसी पानी से खाना बनाने तक की मजबूरी बनी हुई है. PHED विभाग के एसडीओ अशोक पासवान ने बताया कि कई स्थानों पर टंकी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है. उन्होंने कहा कि खराब चापाकलों की मरम्मत के लिए कनीय अभियंता को निर्देश दिया जाएगा.
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने खराब चापाकलों की तुरंत मरम्मत और हर घर नल-जल योजना को जल्द पूरा करने की मांग की है, ताकि उन्हें शुद्ध पेयजल मिल सके और वे दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बच सकें. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि योजना की देरी का सीधा असर ग्रामीण जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है.
