झारखंड : प्राकृतिक वनों का होगा कायाकल्प, नदी तटों को मिलेगा नया जीवनदान, रंग लगाएगी सिल्विकल्चरल ऑपरेशन योजना

Ranchi : राज्य के वनों के सुनियोजित विकास, प्राकृतिक पुनरुद्धार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में झारखंड वन विभाग ने कवायद शुरू...

झारखंड वन विभाग

Ranchi : राज्य के वनों के सुनियोजित विकास, प्राकृतिक पुनरुद्धार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में झारखंड वन विभाग ने कवायद शुरू कर दी है. सिल्विकल्चरल ऑपरेशन योजना (Silvicultural Operation Scheme ) और नदी तट वृक्षारोपण योजना के तहत राज्य के विभिन्न प्रमंडलों में जंगलों के घनत्व को बढ़ाने, जल व भू-संरक्षण करने और नदी तटों को हरा-भरा बनाने के कार्यों को गति दी जाएगी.

प्राकृतिक वनों का कायाकल्प

राज्य के चिन्हित वन प्रमंडलों धनबाद, गिरिडीह (पूर्वी एवं पश्चिमी), देवघर, गोड्डा, मेदिनीनगर और गढ़वा (उत्तरी एवं दक्षिणी) में वनों के संवर्द्धन और प्राकृतिक पुनरुद्धार का कार्य तीव्र गति से किया जाएगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य खुले और सामान्य सघन वनों की गुणवत्ता में सुधार करना है. कार्य शुरू करने से पहले और बाद में स्थलों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है, ताकि वनों के घनत्व में आने वाले सकारात्मक बदलाव का सटीक आंकलन किया जा सके. वनों के संवर्द्धन के दौरान खूंटों (स्टंप) को जमीन से छह इंच छोड़कर एक बार में तेज औजार से काटा जाएगा ताकि वे फटे नहीं. इसके साथ ही, स्थानीय और प्राकृतिक प्रजातियों के दो सौ पौधे प्रति हेक्टेयर की दर से गैप-एनरिचमेंट प्लांटेशन के रूप में लगाए जाएंगे. जिन्हें स्थायी पौधशालाओं से ट्यूब प्लांट्स के रूप में तैयार किया जाएगा.

नदी किनारों को मिलेगा नया जीवन

पर्यावरण संतुलन और मृदा अपरदन को रोकने के लिए चाईबासा सामाजिक वानिकी प्रमंडल के अंतर्गत नदी तटों पर वृक्षारोपण और उसके समापन कार्यों (द्वितीय वर्ष) को प्राथमिकता दी गई है. विशिष्ट प्रजातियों के बड़े पौधों का रोपण, नदी के किनारों पर मिट्टी और नमी के अनुकूल चार से पांच फीट की औसत ऊंचाई वाले मजबूत पौधे लगाए जाएंगे. इनमें अर्जुन, सेमल, कदम, करंज, जामुन, आम, बेल, बेर, इमली, पीपल, बरगद, नीम, सिरिस, गम्हार और शीशम जैसी मूल्यवान प्राकृतिक प्रजातियां शामिल होंगी.

भूमि उपयोग और पारदर्शिता

नदी तट पर वृक्षारोपण के लिए शत-प्रतिशत वनभूमि या गैर-मजरुआ भूमि उपलब्ध न होने की स्थिति में, अधिकतम तीस प्रतिशत तक रैयती भूमि का भी स्वेच्छा से इकरारनामा-सह-अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर उपयोग किया जा सकता है. वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी. सभी प्रकार के भुगतान केवल सीधे बैंक या डाकघर खाते के माध्यम से ही किए जाएंगे. नकद लेनदेन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.

जियो-टैगिंग और पोर्टल पर डेटा इंट्री

सभी कार्यों का विवरण विभाग के ‘जोहार’ पोर्टल और आधिकारिक वेबसाइट पर अद्यतन रखा जाएगा. जीवित पौधों का प्रतिशत वर्षवार फोटो सहित सार्वजनिक किया जाएगा. योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों से तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) का मूल्यांकन कराया जाएगा. साथ ही नियमित रूप से सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) भी अनिवार्य किया गया है.अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) ने सभी संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करें. प्रत्येक माह की पांच तारीख तक भौतिक एवं वित्तीय प्रगति रिपोर्ट उच्च कार्यालय को प्रेषित करना सुनिश्चित करें.

 

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