Ranchi: झारखंड पुलिस ने आम नागरिकों को डीप फेक वीडियो फ्रॉड के बढ़ते खतरों के प्रति आगाह किया है. साइबर अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया से तस्वीरें और आवाजें चुराकर नकली पहचान बनाने के मामले सामने आ रहे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए झारखंड पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
कैसे होता है डीप फेक फ्रॉड?
डीप फेक फ्रॉड कई चरणों में होता है. सबसे पहले डाटा की चोरी की जाती है. साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स आदि) से आपकी फोटो, वीडियो और आवाज इकट्ठा करते हैं. इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मदद से आपके चेहरे और आवाज का हुबहू नकली (डीप फेक) वीडियो तैयार किया जाता है. नकली वीडियो बनाने के बाद व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों से आपके दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क किया जाता है. इसके बाद आपात स्थिति का हवाला देकर पीड़ितों के परिचितों से मोटी रकम ट्रांसफर करने को कहा जाता है, जिससे लोग झांसे में आ जाते हैं. पैसे मिलते ही साइबर अपराधी गायब हो जाते हैं, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि पीड़ित की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचती है.
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ठगी होने पर क्या करें?
यदि आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना देर किए तुरंत अपने बैंक को सूचित करें. इसके साथ ही भारत सरकार के साइबर अपराध पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं. पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं या अपने नजदीकी साइबर थाना से संपर्क कर सकते हैं. पुलिस ने सभी सबूत, जैसे चैट, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने की सलाह दी है.
सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये टिप्स
किसी भी वीडियो या आवाज पर तुरंत विश्वास न करें. संदेह होने पर संबंधित व्यक्ति को तुरंत सामान्य कॉल करके पुष्टि करें. सोशल मीडिया पर अपनी फोटो, वीडियो और व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखें. अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत रखें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें.
