Ranchi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा दिल्ली में की गई एक उच्च स्तरीय स्क्रूटनी के दौरान झारखंड पुलिस द्वारा भेजे गए मानव तस्करी के आंकड़ों में भारी गलतियां और कमियां पाई गई हैं. इसके बाद झारखंड CID ने राज्य के सभी जिलों के SSP और SP (रेलवे सहित) को पत्र लिखकर डेटा को संशोधित कर एक्सेल फॉर्मेट (Excel format) में उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. CID ने इस मामले को उच्च प्राथमिकता देने को कहा है ताकि संशोधित और सही आंकड़े तुरंत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजे जा सकें.
इन बिंदुओं पर सामने आई गलतियां, डेटा में मिली ये गंभीर कमियां
– NHRC की जांच (वाद संख्या- 35/18/5/2023) में बच्चों और महिलाओं की तस्करी से जुड़े आंकड़ों में झारखंड पुलिस की कई लापरवाहियां उजागर हुई हैं.
– मानव तस्करों को सजा मिलने, कोर्ट से बरी होने और लंबित मुकदमों की स्थिति से जुड़ा डेटा पूरी तरह गायब था. कई महत्वपूर्ण एंट्रीज में रिमार्क कॉलम को खाली छोड़ दिया गया था.
– पुलिस ने कई गंभीर मामलों के आगे बिना किसी स्पष्टीकरण के सीधे Nil” “NA” या “Yes” लिख दिया था. पीड़ितों की स्थिति और केस के नतीजों को लेकर भी अधूरी जानकारी दी गई थी.
– कई जिलों के आंकड़ों में भारी गलतियां मिलीं. उदाहरण के लिए- साहिबगंज के बोरियो थाने में दर्ज एक केस (FIR No. 22/2022) में घटना 17 अगस्त 2021 की थी, लेकिन FIR फरवरी 2022 में दर्ज हुई. इस भारी देरी का पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था. वही साहिबगंज AHTY के एक मामले में घटना की तारीख बाद की और रेस्क्यू की तारीख पहले की दर्ज कर दी गई, जो पूरी तरह गलत थी.
नवजात और बच्चों के मामलों में ढिलाई
एक नवजात बच्ची की तस्करी से जुड़े केस (सीरियल नंबर 33) में पुलिस ने ज्यादातर कॉलम खाली छोड़ दिए थे. कई मामलों में सालों की देरी से FIR दर्ज की गई और पीड़ितों का अब तक सुराग नहीं लग सका है.
अब नए ‘Revised Format’ में देना होगा पूरा ब्योरा
– NHRC की महानिदेशक (अन्वेषण) के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद अब झारखंड पुलिस को नए सिरे से तैयार एनेक्चर-बी फॉर्मेट में महिलाओं और बच्चों की तस्करी का पूरा डेटा देना होगा. इस नए प्रश्नावली और डेटा शीट में पुलिस को निम्नलिखित जानकारियां विस्तार से देनी होंगी.
– साल 2022 से 2025 तक दर्ज FIR, चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन, चिन्हित हॉटस्पॉट, गिरफ्तार आरोपी, दाखिल चार्जशीट और सजा, बरी होने का पूरा ब्योरा.
– पीड़ितों से जबरन मजदूरी यौन शोषण, जबरन शादी, अंग व्यापार या भीख मंगवाने जैसे कारणों का स्पष्ट वर्गीकरण.
– रेस्क्यू किए गए पीड़ितों में से कितनों को काउंसलिंग, कानूनी सहायता, वित्तीय मदद, शिक्षा या कौशल प्रशिक्षण दिया गया और कितनों को उनके परिवारों से मिलाया गया.
– हर व्यक्तिगत मामले में यह भी बताना होगा कि जांच लंबित रहने या कोर्ट से आरोपियों के बरी होने की मुख्य वजहें क्या रहीं.


