झारखंड की जीवनदायिनी नदियों पर प्रदूषण का कहर, औद्योगिक कचरे ने घोला ‘जहर’, 24 में 18 जिलों का भू जल भी प्रदूषित

RANCHI: झारखंड की प्रमुख नदियां और जलाशय अब केवल जल स्रोत नहीं रह गए हैं, बल्कि वे शहरी सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट...

RANCHI: झारखंड की प्रमुख नदियां और जलाशय अब केवल जल स्रोत नहीं रह गए हैं, बल्कि वे शहरी सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गए हैं. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार झारखंड की प्यास बुझाने वाली नदियां खुद दम तोड़ रही हैं.

नदियों में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड का स्तर बढ़ा

राज्य की नदियों में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, पीने योग्य पानी में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड का स्तर तीन मिलिग्राम से कम होना चाहिए, लेकिन झारखंड की कई नदियों में यह सीमा पार हो चुकी है.

हरमू नदी (रांची): कभी रांची की पहचान रही यह नदी अब एक बड़े नाले में तब्दील हो चुकी है. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, हरमू नदी का पानी मानव उपयोग के लिए पूरी तरह असुरक्षित है.

स्वर्णरेखा नदी: रांची के नामकुम और टाटीसिल्वे क्षेत्रों में औद्योगिक कचरे और सीवेज के सीधे बहाव ने इस स्वर्णरेखा को विषाक्त बना दिया है. जमशेदपुर तक पहुंचते इसका प्रदूषण स्तर उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है.

दामोदर नदी: कोयलांचल (धनबाद-बोकारो) की जीवनरेखा मानी जाने वाली दामोदर नदी कोल डस्ट और उद्योगों के रासायनिक कचरे से काली पड़ चुकी है.

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जलाशयों और भूजल की स्थिति: आंकड़ों की जुबानी

झारखंड का भूजल भी अब रसायनों की गिरफ्त में है। राज्य के 24 में से 18 जिलों में भूजल प्रदूषित पाया गया है. रांची सहित कई शहरों में वॉटर क्वालिटी इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है. नदियों में घुलित ऑक्सीजन कम होने से जलीय जीव मर रहे हैं, जिससे पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ रहा है. गर्मियों के दस्तक देते ही, भूजल स्तर नीचे जाने से इन रसायनों की सांद्रता और बढ़ जाती है, जिससे जल संकट और गहरा गया है.

प्रदूषक तत्व प्रभावित क्षेत्र और प्रभाव

  • नाइट्रेट रांची के शहरी इलाकों में स्तर बढ़ा, बच्चों में ब्लू बेबी सिंड्रोम का खतरा.
  •  फ्लोराइड पलामू, गढ़वा और गिरिडीह के भूजल में अधिकता, हड्डियों और दांतों की बीमारियां.
  •  आयरन कोल्हान और रांची के कई हिस्सों में मानक से अधिक, लीवर और पेट संबंधी रोग.
  • आर्सेनिक साहिबगंज और पाकुड़ जैसे गंगा तटीय क्षेत्रों में खतरनाक स्तर.
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