Ranchi: झारखंड के शहरी इलाकों को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की कवायद तेज हो गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज नगर विकास विभाग की महत्वाकांक्षी ‘जीआइएस आधारित शहरी प्रबंधन प्रणाली’ की समीक्षा की और अधिकारियों को काम में और तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए. यह परियोजना राज्य के 49 शहरी निकायों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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क्या है यह नई व्यवस्था?
लैडर से डिजिटल मैपिंग: रांची, धनबाद और गिरिडीह में हवाई लैडर सर्वेक्षण पूरा हो चुका है. अब सड़कों से लेकर स्ट्रीट लाइट और पानी के स्रोतों तक की ‘डिजिटल कुंडली’ तैयार की जा रही है.
जियो-टैगिंग और सटीक रिकॉर्ड: हर संपत्ति और शहरी परिसंपत्ति की जियो-टैगिंग होगी, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और राजस्व वसूली में पारदर्शिता आएगी.
पारदर्शी प्रशासन: यह सिस्टम न केवल परिसंपत्ति प्रबंधन को बेहतर बनाएगा, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा.
पायलट प्रोजेक्ट से पूरे राज्य तक का सफर
बैठक में सीएम ने निर्देश दिया कि रांची, धनबाद और गिरिडीह में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों का विश्लेषण कर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य के निकायों में लागू करने की ठोस कार्ययोजना बनाई जाए. उन्होंने कहा कि समय-सीमा और गुणवत्ता से समझौता किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा. यह परियोजना राज्य में ‘स्मार्ट अर्बन गवर्नेंस’ की नींव रखने वाली है. इस समीक्षा बैठक में विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.


