Ranchi: जेपीएससी परीक्षा विवाद में एक नया मोड़ आ गया है. इस पूरे प्रकरण में अभय तिवारी द्वारा सार्वजनिक किए गए चार मुख्य आरोपियों के नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी बनाए गए ये चारों व्यक्ति मेधा सिविल सर्विस कोचिंग संस्थान से पढ़े हैं. इस खुलासे के बाद लोगों का कहना है कि एक ही कोचिंग संस्थान से चारों प्रमुख आरोपियों का जुड़ाव महज़ एक संयोग नहीं हो सकता. ऐसे में इसे साधारण इत्तेफाक मानकर नजरअंदाज करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा.

आधिकारी बने सिर्फ चार नहीं पूरे नेटवर्क के जांच की मांग
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है. लोगों का स्पष्ट मानना है कि यह सवाल अब सिर्फ चार व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है. इस सिलसिले में मांग उठ रही है कि सीआईडी को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उस कोचिंग संस्थान से जुड़े तमाम लोगों चाहे वे संचालक हों, शिक्षक हों या अन्य कर्मचारी की निष्पक्ष और जांच करनी चाहिए.

अगर सब साफ है तो जांच से डर कैसा?
सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों और नागरिकों का एक ही सवाल ट्रेंड कर रहा है अगर संस्थान और उससे जुड़े लोग पूरी तरह साफ-सुथरे हैं, तो फिर निष्पक्ष जांच से डर कैसा?
सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक यही आवाज गूंज रही है कि जब तक पूरे नेटवर्क की तह तक जांच नहीं होगी और इस रैकेट के असली आकाओं को बेनकाब नहीं किया जाएगा, तब तक परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते रहेंगे.

