Hazaribagh: केरेडारी प्रखंड क्षेत्र चार से पांच वर्षों के दौरान पानी के मामले में ड्राई जोन के रूप में उभरता जा रहा है. जो एक गंभीर समस्या का रूप ले रहा है. पूर्व से ही केरेडारी के पेटो, कराली और पचड़ा पंचायत अर्ध ड्राई क्षेत्र रहा है.
कई पंचायतें रेड जोन में शामिल
वहीं पांच वर्षों के अंदर केरेडारी प्रखंड का कराली, पेटो, पचड़ा, पांडु, बेंगवरी, गरी कलां, कंडाबेर, बेलतू, बारियातू पंचायत पानी के लिए रेड जोन के रूप में चिन्हित होता जा रहा है. पांच वर्ष पूर्व इन पंचायतों में पानी की कोई किल्लत नहीं थी, लेकिन बीते वर्षों में अप्रैल माह में ही पानी की समस्या सामने आने लगी है. क्षेत्र के नदी, तालाब, कुआं, बोरवेल और चापानल जवाब दे रहे हैं.
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ड्राई जोन बनने के प्रमुख कारण
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार केरेडारी प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्र बड़कागांव में एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल माइंस और नॉर्थ वेस्ट कोल माइंस का संचालन, वहीं केरेडारी के पांडु में केरेडारी कोल माइंस और चट्टी बरियातू में कोल माइंस का खुलना प्रमुख कारण है. इसके अलावा पश्चिमी क्षेत्र टंडवा (चतरा) में सीसीएल का आम्रपाली कोल माइंस भी इसका एक बड़ा कारण माना जा रहा है.
प्राकृतिक जल स्रोत हुए प्रभावित
खनन के दौरान कई प्राकृतिक जल स्रोत नष्ट हो गए हैं. जल स्रोतों के खत्म होने से पानी का स्तर लगातार नीचे चला गया है और जल जमाव के स्रोत भी समाप्त होते जा रहे हैं. इसके साथ ही हजारों की संख्या में पेड़ पौधों की कटाई से जलवायु पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है.
जल संरक्षण की उठी मांग
पानी की गंभीर समस्या को देखते हुए भाकपा माले के नेता पैरू प्रताप राम समेत अन्य लोगों ने एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड से मांग की है कि क्षेत्र में पुराने जल स्रोतों को संरक्षित किया जाए. साथ ही वर्षा जल संचयन के लिए बड़े डैम, चेकडैम और तालाबों का निर्माण कराया जाए, ताकि जल स्तर को संतुलित रखा जा सके.
