Hazaribagh : श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा बाजार में शनिवार को आयोजित धर्मसभा श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही. कार्यक्रम मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न मांगलिक क्रियाओं के साथ समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के चरण चिन्हों के स्मृति प्रतीकों का सामूहिक विमोचन किया गया. धर्मसभा में जानकारी दी गई कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के चरण चिन्हों को भारत के विभिन्न शहरों के साथ-साथ सिंगापुर और लंदन जैसे विदेशी स्थलों पर भी स्थापित किया जाएगा. श्रद्धालुओं को ये स्मृति प्रतीक गुरु पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर 18 जून को प्रदान किए जाएंगे.
धार्मिक कार्यों में उत्साह और श्रद्धा जरूरी : मुनि धर्म सागर जी
सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि धार्मिक एवं मांगलिक कार्य सदैव उत्साह, श्रद्धा और समर्पण भाव के साथ किए जाने चाहिए. उन्होंने धर्म के प्रति जागरूकता और नियमित सहभागिता पर बल दिया.
चरण स्पर्श केवल परंपरा नहीं, आत्मिक विकास का माध्यम : मुनि भाव सागर जी
अपने प्रवचन में मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने चरण स्पर्श की परंपरा के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग हर संस्कृति और धर्म में चरण स्पर्श को सम्मान, विनम्रता और श्रद्धा का प्रतीक माना गया है. उन्होंने कहा कि प्रभु और गुरु के चरणों में सिर झुकाने से व्यक्ति के भीतर अहंकार कम होता है तथा सकारात्मक सोच का विकास होता है. चरण वंदना मन में शांति, समर्पण और सेवा भाव उत्पन्न करती है. इसे केवल एक सामाजिक रस्म न मानकर आत्मिक उन्नति और संस्कारों से जोड़कर देखने की आवश्यकता है.
500 से अधिक स्थानों पर स्थापित हो चुके हैं चरण चिन्ह
कार्यक्रम के दौरान आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन, तपस्या और समाज के प्रति उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला गया. बताया गया कि उनके चरण चिन्ह देशभर में 500 से अधिक स्थानों पर स्थापित किए जा चुके हैं तथा भविष्य में इस संख्या को बढ़ाकर 1008 तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
18 और 19 जून के धार्मिक आयोजनों में शामिल होने की अपील
समाज के अध्यक्ष नागेंद्र विनायका, महामंत्री संजय अजमेरा, महिला समाज की अध्यक्षा प्रेमलता लुहाड़िया तथा मंत्राणी आशा विनायका ने श्रद्धालुओं से 18 एवं 19 जून को आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की.
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